महात्मा फुले वाड़ा’ में वट पूजा पर लगा प्रतिबंध वापस।

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■ हिंदू जनजागृति समिति सहित हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों के संघर्ष को बड़ी सफलता।

■ प्रतिबंध लगाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी? – रमेश शिंदे

मुंबई वार्ता संवाददाता

पुणे के ऐतिहासिक ‘महात्मा फुले वाड़ा’ परिसर में वटवृक्ष की पूजा पर पुरातत्व विभाग द्वारा लगाया गया प्रतिबंध अंततः सरकार द्वारा वापस ले लिया गया है। हिंदू जनजागृति समिति, राष्ट्रभक्त अधिवक्ता समिति, हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति, सुराज्य अभियान और रणरागिणी शाखा के एक प्रतिनिधिमंडल ने पुरातत्व विभाग, पुलिस प्रशासन और पुणे महानगरपालिका आयुक्त कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर इस संभावित प्रतिबंध को तुरंत हटाने की मांग की थी। इन संगठित प्रयासों को बड़ी सफलता मिली है और प्रशासन को अपना निर्णय बदलना पड़ा है।

ज्ञापन में कहा गया था कि यह हिंदू महिलाओं की धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों पर आघात है। हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों के इस तीव्र आंदोलन और मांगों का संज्ञान लेते हुए, पुरातत्व और संग्रहालय निदेशालय के सहायक निदेशक डॉ. विलास वाहने ने खड़क पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक को एक पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि, ‘‘महात्मा फुले वाड़ा स्मारक के राज्य संरक्षित घोषित होने से पहले के समय से चली आ रही परंपराओं और रीति-रिवाजों की यथास्थिति बनाए रखी जाए। साथ ही, वट पूर्णिमा के दिन कानून-व्यवस्था अबाधित रहे, इसके लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए।’’

■ प्रतिबंध लगाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी? – श्री रमेश शिंदे

इस निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, हिंदू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री रमेश शिंदे ने कहा कि पुरातत्व विभाग ने फुले वाड़ा के सामने स्थित वटवृक्ष पर चल रही वटसावित्री व्रत की पारंपरिक पूजा को रोकने का एक ‘तुगलकी’ (तानाशाही) आदेश जारी किया था। हिंदू जनजागृति समिति द्वारा किए गए विरोध और अधिवक्ताओं द्वारा दिए गए कानूनी नोटिस के कारण, उन्हें लोकतंत्र का अहसास हुआ। यह स्वीकार करते हुए कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता है, उन्होंने उस तुगलकी आदेश को वापस ले लिया है। इसके लिए फडणवीस सरकार का अभिनंदन; लेकिन इस मामले में सरकार से यह मांग है कि वह हिंदुओं को अकारण परेशान करने का प्रयास करने वाले और जानबूझकर बाधा उत्पन्न करने वाले पुरातत्व विभाग के संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करे, ताकि उन्हें यह अहसास हो सके कि वर्तमान में महाराष्ट्र में ऐसा तुगलकी प्रशासन नहीं चलेगा।

इस सफलता के बाद, समिति की ओर से श्री रमेश शिंदे ने आवाहन किया है कि, ‘‘अधिक से अधिक हिंदू महिलाएं महात्मा फुले वाड़ा में एकत्र हों और उत्साहपूर्वक वटवृक्ष की पूजा करें, अपनी धार्मिक परंपरा को संजोएं और इस जीत का आनंद मनाएं।

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