■ हाईकोर्ट की बीएमसी को फटकार गंभीर, जिम्मेदारी तय कर अधिकारियों पर हो कड़ी कार्रवाई
मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

मुंबई में बुनियादी सुविधाओं की बदहाल स्थिति को लेकर कांग्रेस लगातार सवाल उठाती रही है, लेकिन इसकी अनदेखी की गई। विकास कार्यों के नाम पर मुंबई की तिजोरी खाली की जा रही है। ऐसे में मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के कामकाज पर की गई गंभीर टिप्पणियां बेहद महत्वपूर्ण हैं। भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी में लिप्त लोगों को न्यायालय की फटकार करारा जवाब है। मुंबई को सिंगापुर बनाने का दावा करने वालों ने शहर को कचराकुंडी बनाकर रख दिया है। मुंबई की बदहाली के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। यह मांग मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद वर्षा गायकवाड ने की है।


बीएमसी के कामकाज पर सवाल उठाते हुए वर्षा गायकवाड ने कहा कि उच्च न्यायालय ने शहर में कचरे की समस्या को लेकर जो गंभीर टिप्पणियां की हैं, उनसे मुंबई की वास्तविक स्थिति एक बार फिर सामने आई है। विकास के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद मुंबईकरों को आवश्यक सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि बीएमसी में सत्ताधारी पक्ष, अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत का खामियाजा मुंबईकरों को भुगतना पड़ रहा है। इसी गठजोड़ के कारण शहर की हालत लगातार खराब होती जा रही है।
वर्षा गायकवाड ने कहा कि मुंबई में अच्छे सड़क मार्ग नहीं हैं, पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है और महानगरपालिका के अस्पतालों की स्थिति बेहद खराब है। बेस्ट बस सेवा भी संकट में है, जबकि महानगरपालिका के स्कूलों की हालत चिंताजनक बनी हुई है। इसके अलावा शहर की ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था भी गंभीर सवालों के घेरे में है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन बुनियादी समस्याओं को दूर करने के बजाय सत्ताधारियों की प्राथमिकता निजीकरण और शहर की महत्वपूर्ण जमीनें अपने पसंदीदा उद्योगपतियों और बिल्डरों को सौंपने में अधिक दिखाई देती है। आम मुंबईकरों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अपेक्षित प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
वर्षा गायकवाड ने सवाल किया कि उच्च न्यायालय की गंभीर फटकार के बाद क्या अब महानगरपालिका प्रशासन की नींद खुलेगी? उन्होंने मांग की कि मुंबई की बदहाल स्थिति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।


