मुंबई वार्ता संवाददाता

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस ने सोमवार को महाराष्ट्र के सभी जिलों में विरोध प्रदर्शन और मोर्चे निकाले। कांग्रेस ने उन पर मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए उन्हें पद से तत्काल बर्खास्त करने और गिरफ्तार करने की मांग की। महाराष्ट्र कांग्रेस ने 28 सितंबर को राज्यभर में प्रदर्शन की घोषणा पहले ही की थी।


कांग्रेस के अनुसार, अमरावती में ज्ञानेश कुमार के पुतले की गधे पर सवारी निकालकर विरोध जताया गया, जबकि ठाणे में पुतले से उठक-बैठक कराई गई। पुणे, कोल्हापुर, सोलापुर, नासिक, नागपुर, छत्रपति संभाजीनगर, चंद्रपुर, नांदेड, लातूर, बीड, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, रायगढ़, धाराशिव, यवतमाल, हिंगोली, जालना, परभणी, पालघर, नंदुरबार, भंडारा और अकोला समेत विभिन्न जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालयों तक मोर्चे निकाले और ज्ञापन सौंपे।


कोल्हापुर में विधान परिषद में कांग्रेस के गुटनेता एवं पूर्व मंत्री सतेज उर्फ बंटी पाटील, सोलापुर में कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य सांसद प्रणिती शिंदे, अमरावती में कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य एवं पूर्व मंत्री एडवोकेट यशोमती ठाकुर और सांसद बलवंत वानखड़े, छत्रपति संभाजीनगर में सांसद डॉ. कल्याण काले, चंद्रपुर में सांसद प्रतिभा धानोरकर, नांदेड में सांसद रविंद्र चव्हाण, लातूर में सांसद डॉ. शिवाजी काले और ठाणे में पूर्व सांसद कुमार केतकर समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रदर्शन में शामिल हुए।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के माध्यम से देशभर में करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से हटाए गए हैं। पार्टी ने इसे लोकतंत्र और संविधान के लिए गंभीर चिंता बताया है। कांग्रेस का यह भी आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से सत्तारूढ़ भाजपा को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया।
इस पूरे विवाद के बीच चुनाव आयोग के भीतर भी मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को लेकर मतभेद सामने आने की खबरें आई हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं। इनमें मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने तथा मतदाता सूची के डेटा प्रबंधन से जुड़े मुद्दे शामिल थे।
कांग्रेस ने इन रिपोर्टों को अपने आरोपों के समर्थन के रूप में पेश किया है। पार्टी का कहना है कि इससे राहुल गांधी द्वारा चुनावी प्रक्रिया और कथित ‘वोट चोरी’ को लेकर उठाए गए सवालों को बल मिला है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि एसआईआर से संबंधित आदेश तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बाद जारी किए गए थे और मतदाता पंजीकरण से जुड़े फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है।
कांग्रेस ने कहा कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाकर उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक उसका आंदोलन जारी रहेगा और इसे और तेज किया जाएगा। पार्टी ने जिलाधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर कुमार की तत्काल बर्खास्तगी और गिरफ्तारी की मांग की।


