मुंबई वार्ता संवाददाता

दक्षिण मुंबई में रहने वाली 68 वर्षीय महिला से साइबर ठगों ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारियों का रूप धारण कर कथित तौर पर 3.02 करोड़ रुपये ठग लिए। आरोपियों ने महिला को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाने और गिरफ्तार करने की धमकी देकर उसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ में होने का झांसा दिया।
पुलिस के अनुसार, ठगी की घटना 21 अगस्त से 12 सितंबर के बीच हुई। महिला अकेली रहती हैं। इसी दौरान उन्हें व्हाट्सऐप पर एक वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताते हुए कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग की जांच में उनका नाम सामने आया है।


इसके बाद ठगों ने खुद को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) के अधिकारी के रूप में पेश किया। उन्होंने महिला को लगातार धमकाते हुए कहा कि उन्हें किसी भी समय गिरफ्तार किया जा सकता है।
आरोपियों ने महिला की उम्र का हवाला देते हुए कहा कि उनसे ऑनलाइन पूछताछ की जाएगी। इसके बाद उन्हें कथित तौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर दिया गया। ठगों ने महिला से उनके बैंक खातों, फिक्स्ड डिपॉजिट और अन्य वित्तीय लेनदेन की जानकारी भी हासिल की।
आरोपियों ने महिला से कहा कि सरकारी एजेंसियां यह जांच करना चाहती हैं कि उनके पास मौजूद धन का संबंध किसी आपराधिक गतिविधि से तो नहीं है। इसी बहाने उन्होंने महिला को कुछ बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करने के लिए कहा। ठगों ने भरोसा दिलाया कि जांच और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पूरी रकम उन्हें वापस कर दी जाएगी।
कॉल करने वालों को वास्तविक अधिकारी समझकर महिला ने तीन अलग-अलग लेनदेन के जरिए कुल 3.02 करोड़ रुपये उनके बताए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। हालांकि, इसके बाद आरोपियों ने रकम वापस नहीं की और कुछ समय बाद महिला के फोन कॉल का जवाब देना भी बंद कर दिया।
इसके बाद महिला ने अपने भाई को घटना की जानकारी दी। भाई को समझ में आया कि महिला साइबर ठगी का शिकार हो गई हैं। इसके बाद महिला ने 14 सितंबर को दक्षिण क्षेत्र साइबर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई।
मामले की जांच पुलिस उपायुक्त बजरंग बंसोडे के नेतृत्व में की जा रही है। वरिष्ठ निरीक्षक नंदकुमार गोपाले और उपनिरीक्षक दिपेश शिंदे सहित पुलिस टीम आरोपियों का पता लगाने और रकम के लेनदेन की जांच में जुटी है।


