मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार की ओर से नागरिकों से व्यक्तिगत खर्चों में कटौती कर बची रकम सूखा राहत के लिए देने की अपील पर शिवसेना (यूबीटी) ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पार्टी ने सरकार से सवाल किया है कि सूखा प्रभावित किसानों और नागरिकों की मदद की जिम्मेदारी जनता पर डालने के बजाय सरकार अपने स्तर पर पर्याप्त धन की व्यवस्था क्यों नहीं करती।


शिवसेना (यूबीटी) ने अपने मुखपत्र के संपादकीय में सरकार की अपील की आलोचना करते हुए कहा कि आर्थिक परेशानी झेल रहे नागरिकों से पैसे मांगने के बजाय सरकार को अपनी व्यवस्था के भीतर से धन जुटाने के उपाय करने चाहिए। पार्टी ने कथित भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए व्यवस्था में मौजूद वित्तीय संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल की मांग की।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हाल में नागरिकों से व्यक्तिगत समारोहों और अन्य खर्चों में कटौती कर बचत की राशि सूखा राहत के लिए देने की अपील की थी। शिवसेना (यूबीटी) ने इसी अपील को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाया है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब महाराष्ट्र के बड़े हिस्से में सूखे की स्थिति घोषित की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 358 में से 265 तहसीलों में सूखा घोषित किया गया है, जो राज्य के करीब 75 प्रतिशत हिस्से को प्रभावित करता है। विपक्षी दलों ने किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे पहले ही सूखे की स्थिति पर चर्चा के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने और किसानों के कर्ज के लिए सरकारी गारंटी देने की मांग कर चुके हैं। पार्टी ने राहत कार्यों की निगरानी के लिए सहायता केंद्र शुरू करने की भी बात कही है।
शिवसेना (यूबीटी) विधायक आदित्य ठाकरे ने भी सूखा प्रभावित किसानों तक सीधे आर्थिक सहायता पहुंचाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि सरकार द्वारा घोषित राहत केवल कागजों तक सीमित न रहे और पात्र किसानों के बैंक खातों तक सहायता पहुंचाई जाए।
पार्टी का कहना है कि सूखे से प्रभावित किसानों को तत्काल राहत देने के लिए सरकार को उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करना चाहिए और राहत वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए।


