मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई में अनुसूचित जाति (एससी) आरक्षण के उपवर्गीकरण की मांग को लेकर मंगलवार, 29 सितंबर को मातंग समाज की ओर से बड़ा आंदोलन किया गया। राज्य के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग मुंबई पहुंचे और सीएसएमटी तथा आसपास के इलाकों में प्रदर्शनकारियों की भीड़ जमा हो गई। पीले झंडों और बैनरों के साथ पहुंचे प्रदर्शनकारियों से पूरा परिसर पीले जनसैलाब में तब्दील नजर आया। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।


सकल मातंग समाज की ओर से आझाद मैदान में ‘निर्धार महामोर्चा’ का आयोजन किया गया है। समाज की प्रमुख मांग अनुसूचित जाति के 13 प्रतिशत आरक्षण में उपवर्गीकरण कर वंचित जातियों को अलग-अलग हिस्सेदारी देना है। आंदोलनकारियों का कहना है कि आरक्षण का लाभ सभी संबंधित जातियों तक समान रूप से पहुंचना चाहिए।
इस महामोर्चे की घोषणा पहले ही की गई थी। समाज की ओर से सरकार को 25 सितंबर तक ठोस निर्णय लेने का अल्टीमेटम दिया गया था। निर्णय नहीं होने पर 29 सितंबर को मुंबई में बड़े पैमाने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी गई थी।
मातंग समाज के नेताओं के अनुसार, महाराष्ट्र में अनुसूचित जाति वर्ग में 59 जातियां शामिल हैं। उनका दावा है कि इनमें कुछ जातियों को आरक्षण का अपेक्षाकृत अधिक लाभ मिला है, जबकि मातंग समाज समेत कुछ अन्य समुदाय अपेक्षित लाभ से वंचित हैं। इसी वजह से एससी आरक्षण के भीतर उपवर्गीकरण लागू करने की मांग की जा रही है।
इस मुद्दे पर 1 अगस्त 2024 को सुप्रीम कोर्ट की सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने अनुसूचित जाति आरक्षण के उपवर्गीकरण से संबंधित फैसला दिया था। इसके बाद महाराष्ट्र सरकार ने इस विषय का अध्ययन करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति बदर की अध्यक्षता में समिति गठित की थी। समिति ने 16 मार्च 2026 को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। रिपोर्ट पर निर्णय को लेकर मातंग समाज की ओर से लगातार दबाव बनाया जा रहा है।
इस मांग को लेकर राज्य के विभिन्न हिस्सों में पहले भी कई मोर्चे निकाले जा चुके हैं। आंदोलन से जुड़े नेताओं का कहना है कि अब मुंबई में आयोजित महामोर्चे के जरिए सरकार से उपवर्गीकरण पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की जा रही है।
महामोर्चे के मद्देनजर मुंबई पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा तथा यातायात व्यवस्था के लिए व्यापक बंदोबस्त किया है। सीएसएमटी और दक्षिण मुंबई के अन्य इलाकों में प्रदर्शनकारियों की बड़ी संख्या के कारण यातायात पर भी असर पड़ने की स्थिति बनी। प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कुछ आंदोलनकारियों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है। मुंबई पुलिस की ओर से समय-समय पर प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था को लेकर प्रतिबंधात्मक आदेश भी जारी किए जाते रहे हैं।
मातंग समाज की मांग है कि उपवर्गीकरण को कानूनी रूप देकर जल्द लागू किया जाए, ताकि आरक्षण के लाभ से वंचित रह गए समुदायों को उनका हिस्सा मिल सके। वहीं, इस मुद्दे पर अलग-अलग दलित संगठनों और नेताओं के बीच उपवर्गीकरण को लेकर मतभेद भी सामने आए हैं।


