पवई झील में 1 अक्टूबर से पूरी तरह रुकेगा सीवेज का प्रवाह, 20 आउटफॉल इंटरसेप्ट करने का काम 100% पूरा।

Date:

मुंबई वार्ता संवाददाता

पवई झील में मिलने वाले सीवेज को रोकने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने 20 सीवेज प्रवाहों को इंटरसेप्ट कर उन्हें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की ओर मोड़ने का काम 100 प्रतिशत पूरा कर लिया है। इसके साथ ही 1 अक्टूबर 2026 से पवई झील में सीवेज का मिलना पूरी तरह बंद हो जाएगा। यह जानकारी अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (परियोजना) अभिजीत बांगर ने दी।


बीएमसी के मुताबिक, इस परियोजना के तहत कुल 3,056 मीटर लंबी नई सीवरेज पाइपलाइन बिछाई गई है। आदि शंकराचार्य मार्ग पर स्थित 18 सीवेज आउटफॉल को इंटरसेप्ट कर गुरुत्वाकर्षण के जरिए भांडुप सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की ओर मोड़ा गया है। वहीं, पेरूगेट क्षेत्र के दो सीवेज प्रवाहों को इंटरसेप्ट कर फिल्टरपाड़ा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की ओर भेजा गया है।


अभिजीत बांगर ने 30 सितंबर को परियोजना स्थल का दौरा कर काम का निरीक्षण किया और वर्तमान स्थिति तथा आगे की कार्यवाही की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्धारित समयसीमा के भीतर और आवश्यक गुणवत्ता मानकों के अनुसार सभी काम पूरा करने के निर्देश दिए।

■ रोजाना 1.8 करोड़ लीटर सीवेज से हो रहा था प्रदूषण


बीएमसी के अनुसार, वर्ष 1891 में निर्मित पवई झील का कुल जलक्षेत्र 223 हेक्टेयर है। करीब 6.6 किलोमीटर की परिधि वाली इस झील का जलग्रहण क्षेत्र लगभग 600 हेक्टेयर में फैला है और इसकी जलधारण क्षमता करीब 5,455 मिलियन लीटर है। झील के पानी का इस्तेमाल पीने के अलावा अन्य कार्यों के लिए किया जाता है।


पवई क्षेत्र में बढ़ते शहरीकरण के कारण झील में रोजाना करीब 18 मिलियन लीटर सीवेज पहुंच रहा था। इससे झील के पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी। इसे देखते हुए बीएमसी के सीवरेज प्रोजेक्ट और मुंबई सीवेज डिस्पोजल प्रोजेक्ट विभागों ने झील में सीवेज छोड़ने वाले कुल 20 आउटफॉल की जांच की।


■ पवई में बन रहा 80 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता का एसटीपी


बीएमसी ने पवई में बंद पड़े पुराने सीवेज पंपिंग स्टेशन की जगह 8 मिलियन लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला आधुनिक और पूरी तरह स्वचालित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का काम भी शुरू किया है। इस प्लांट में सीवेज का वैज्ञानिक तरीके से उपचार करने के बाद प्रतिदिन 8 मिलियन लीटर उपचारित पानी दोबारा झील में छोड़ा जाएगा।


निविदा के अनुसार इस प्लांट का काम दिसंबर 2028 तक पूरा होना है, लेकिन बीएमसी इसे मई 2027 तक पूरा करने का प्रयास कर रही है। प्लांट शुरू होने के बाद 8 मिलियन लीटर सीवेज इसी संयंत्र में और बाकी 8 मिलियन लीटर भांडुप सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में भेजा जाएगा।

■ 20,340 मीट्रिक टन जलकुंभी हटाई गई


पवई झील की सतह पर फैली जलकुंभी हटाने का काम भी लगातार जारी है। फिलहाल दो हार्वेस्टर मशीनों की मदद से जलकुंभी निकाली जा रही है। इसका अनुमानित कुल परिमाण 24 हजार मीट्रिक टन है। बीएमसी के अनुसार, 29 सितंबर 2026 तक 20,340 मीट्रिक टन यानी करीब 85 प्रतिशत जलकुंभी झील से निकाली जा चुकी है।


अभिजीत बांगर ने बताया कि सीवेज के कारण झील के पानी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ने से जलकुंभी तेजी से बढ़ रही थी। सीवेज का प्रवाह रुकने के बाद जलकुंभी की वृद्धि पर भी नियंत्रण आने की उम्मीद है। हालांकि, झील के मौजूदा पानी में अभी जैविक तत्व मौजूद हैं। पानी की गुणवत्ता में सुधार के लिए जल्द ही विशेष अभियान शुरू किया जाएगा।


उन्होंने कहा कि उपलब्ध जैविक तकनीकों का अध्ययन किया जा रहा है और अगले एक से दो महीनों में उपयुक्त उपायों को लागू करने की शुरुआत की जाएगी।


बीएमसी के मुताबिक, सीवेज प्रवाह को रोकने का काम अगस्त 2025 में शुरू हुआ था और महज 13 महीनों में यह परियोजना पूरी कर ली गई है। अधिकारियों के अनुसार, पवई झील एक पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र है, इसलिए इसकी जल गुणवत्ता और जैवविविधता को बनाए रखने के लिए सीवेज के प्रवेश को रोकना महत्वपूर्ण है।


निरीक्षण के दौरान उप आयुक्त (विशेष अभियांत्रिकी) शशांक भोरे, प्रमुख अभियंता (सीवरेज प्रोजेक्ट) संजयकुमार पांडव, प्रमुख अभियंता (मुंबई सीवेज डिस्पोजल प्रोजेक्ट) राजेंद्र परब सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद थे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

प्रमुख खबरे

More like this
Related