मुंबई वार्ता संवाददाता

दक्षिण मुंबई जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रवि नावकर ने बाणगंगा तालाब में हो रहे प्रदूषण और सैकड़ों मछलियों की मौत के संदर्भ में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) आयुक्त को एक पत्र सौंपा है। पत्र में बाणगंगा तालाब की बिगड़ती स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए तत्काल कार्रवाई करने की मांग की गई है।


■ पत्र का मुख्य विवरण:
पत्र भेजने वाली संस्था: दक्षिण मुंबई जिला कांग्रेस कमेटी
अध्यक्ष: रवि बावकर
प्राप्तकर्ता: आयुक्त, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC)
दिनांक: 06 अक्टूबर 2026 (प्राप्ति मुहर के अनुसार)
विषय: वाळकेश्वर स्थित बाणगंगा तालाब में श्राद्ध पक्ष के दौरान हो रहे पिंडदान से हो रहे प्रदूषण, और मछलियों की मृत्यु के संदर्भ में आपत्ति एवं कार्रवाई बाबत।


■ मुख्य बातें और चिंताएँ:
गणेश विसर्जन पर रोक का स्वागत: कांग्रेस अध्यक्ष ने उल्लेख किया कि बाणगंगा एक ऐतिहासिक/विरासत स्थल (Heritage Precinct) है। पर्यावरण ह्रास और मछलियों की मौत को रोकने के लिए महानगरपालिका द्वारा इस वर्ष गणेश विसर्जन पर लगाई गई रोक का उन्होंने स्वागत किया था।
श्राद्ध पक्ष/पितृपक्ष में प्रदूषण: उन्होंने बताया कि वर्तमान में पितृपक्ष/श्राद्ध के दौरान तालाब में बड़े पैमाने पर पिंडदान किया जा रहा है। इसके अलावा तालाब में फूल, भोजन सामग्री और कपड़े फेंके जा रहे हैं।
पानी दूषित और मछलियों की मौत: भारी मात्रा में पूजन/श्राद्ध सामग्री डाले जाने से तालाब का पानी पूरी तरह दूषित हो चुका है। दिनांक 05/10/2026 के ‘लोकसत्ता’ समाचार पत्र में सैकड़ों मृत मछलियों की तस्वीरें प्रकाशित हुई थीं, जो कि पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक स्थिति को दर्शाती हैं।
समान नियम लागू करने की मांग: पत्र में कहा गया है कि यदि गणेश विसर्जन से तालाब दूषित होता है, तो हजारों पिंडों के विसर्जन (पिंडदान) से यह उससे भी अधिक दूषित होता है। यह नियम सभी के लिए समान रूप से लागू होना चाहिए।
■ प्रमुख मांगें:
पिंडदान पर तत्काल रोक: बाणगंगा तालाब में किसी भी प्रकार के पिंडदान, निर्माल्य (पूजन सामग्री) और अन्न/भोजन सामग्री डालने पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाए।
वैकल्पिक व्यवस्था (स्वतंत्र कुंड): तालाब के बाहर BMC द्वारा पिंडदान के लिए अलग से कृत्रिम कुंड या टंकियों की व्यवस्था की जाए, ताकि श्रद्धालुओं की आस्था भी प्रभावित न हो और ऐतिहासिक तालाब भी सुरक्षित रहे।
सफाई और जल परीक्षण: तालाब से मृत मछलियों को तुरंत हटाया जाए, पानी की त्वरित स्वच्छता की जाए और जल की गुणवत्ता का परीक्षण कराया जाए।


