मुंबई ने भरपूर दिया, अब लौटाने की बारी; प्रदूषण के खिलाफ मुफ्त अभियान में शामिल हों बॉलीवुड सितारे, हाईकोर्ट की दो टूक।

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मुंबई वार्ता संवाददाता

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बॉलीवुड की हस्तियों से कहा कि शहर ने उन्हें बहुत कुछ दिया है, इसलिए अब पर्यावरण संरक्षण के लिए उन्हें भी आगे आकर योगदान देना चाहिए। अदालत ने पटाखों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ जनजागरूकता अभियान में शामिल होने के लिए फिल्मी सितारों द्वारा शुल्क मांगे जाने पर नाराजगी जताई। अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट किया कि ऐसे अभियान के लिए सरकारी खजाने से सेलिब्रिटीज को भुगतान नहीं किया जाना चाहिए।

बॉम्बे हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की खंडपीठ ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को मुंबई और महाराष्ट्र में त्योहारों के दौरान बढ़ते ध्वनि एवं वायु प्रदूषण से संबंधित मामले की सुनवाई करते हुए ये टिप्पणियां कीं।

■ ‘सामाजिक कार्य के लिए 15 मिनट क्यों नहीं दे सकते?’

सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार की अतिरिक्त सरकारी वकील ज्योति चव्हाण ने अदालत को बताया कि प्रदूषण के खिलाफ जागरूकता अभियान में सहयोग के लिए फिल्मी हस्तियों से संपर्क किया गया था, लेकिन वे इसमें भाग लेने के लिए शुल्क मांग रही हैं।इस पर न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि सेलिब्रिटीज मुफ्त में आगे आने के लिए तैयार नहीं हैं, तो उनसे संपर्क करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि इन हस्तियों ने मुंबई में रहकर बहुत कुछ हासिल किया है। यदि उन्हें इस शहर से जुड़ाव महसूस होता है और वे पर्यावरण की चिंता करते हैं, तो उन्हें शहर के लिए कुछ लौटाने के उद्देश्य से आगे आना चाहिए।अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसे जनहित के अभियानों पर सरकारी धन खर्च नहीं किया जाना चाहिए।

खंडपीठ ने मुंबई पुलिस के वार्षिक कार्यक्रम ‘उमंग’ का भी उल्लेख किया। अदालत ने सवाल किया कि जब फिल्मी सितारे पुलिस के कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए समय निकाल लेते हैं, तो प्रदूषण के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए 15 मिनट क्यों नहीं दे सकते?अदालत ने सुझाव दिया कि यदि बॉलीवुड के कलाकार स्वेच्छा से अभियान में शामिल नहीं होते हैं, तो सरकार मराठी फिल्म जगत के कलाकारों से संपर्क कर सकती है, लेकिन उन्हें भी बिना शुल्क के इस जनहित अभियान में भाग लेना चाहिए।

■ सोशल मीडिया पर अपील पर्याप्त नहीं

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि बॉलीवुड के कुछ कलाकारों ने सामाजिक माध्यमों पर वीडियो और संदेश साझा कर लोगों से पटाखे नहीं फोड़ने की अपील की है। हालांकि, अदालत ने संकेत दिया कि केवल सोशल मीडिया पर अपील करना ही पर्याप्त नहीं है। जो कलाकार प्रदूषण के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए तैयार हैं, उन्हें सरकारी अभियान में भी बिना किसी पारिश्रमिक के सहयोग करना चाहिए।

अदालत ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (एमपीसीबी) की ओर से किए जा रहे प्रयासों पर ध्यान दिया। अधिकारियों ने बताया कि पटाखों से होने वाले प्रदूषण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए समाचार पत्रों, टेलीविजन, रेडियो और सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया जा रहा है। महानगरपालिका के स्कूलों में विद्यार्थियों को पटाखे नहीं फोड़ने की शपथ भी दिलाई गई है।अदालत ने इन प्रयासों की सराहना की, लेकिन कहा कि जागरूकता अभियान केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहने चाहिए। स्कूलों में नियमित रूप से ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि बच्चों और नागरिकों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सके।

■ झुग्गी-बस्तियों में भी जागरूकता फैलाने के निर्देश

सुनवाई के दौरान अदालत ने मुंबई की झुग्गी-बस्तियों में प्रदूषण नियंत्रण के नियमों के पालन को लेकर भी चिंता जताई। न्यायमूर्ति कुलकर्णी ने कहा कि कुछ इलाकों में देर रात, यहां तक कि रात दो बजे तक पटाखे फोड़े जाने की शिकायतें सामने आती हैं।अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी समुदाय के खिलाफ टिप्पणी करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सभी लोग नियमों का पालन करें। इसके लिए झुग्गी-बस्तियों में विशेष जागरूकता अभियान चलाने और स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा प्रतिष्ठित नागरिकों की मदद लेने का सुझाव दिया गया।

खंडपीठ ने कहा कि स्थानीय नगरसेवक अपने क्षेत्रों की परिस्थितियों से परिचित होते हैं। इसलिए उन्हें अभियान से जोड़ने पर लोगों तक संदेश अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकता है।

■ शिकायतों के लिए हेल्पलाइन का प्रचार करने पर जोर

अदालत ने ध्वनि प्रदूषण से संबंधित शिकायतों के लिए उपलब्ध हेल्पलाइन की जानकारी नागरिकों तक पहुंचाने की जरूरत पर भी जोर दिया। बीएमसी की ओर से बताया गया कि महानगरपालिका की 24 घंटे चालू रहने वाली आपदा प्रबंधन हेल्पलाइन 1916 के माध्यम से शिकायतें दर्ज कराने की व्यवस्था की जा रही है। मुंबई पुलिस की हेल्पलाइन 100 और 112 के जरिए भी नियमों के उल्लंघन की शिकायतें दर्ज कराने की जानकारी सार्वजनिक करने पर जोर दिया गया।अदालत ने राज्य सरकार, महानगरपालिका, पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों को मिलकर लगातार जागरूकता अभियान चलाने तथा नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है।बॉम्बे हाईकोर्ट की इन टिप्पणियों का मुख्य संदेश यह है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है। सार्वजनिक जीवन में प्रभाव रखने वाली हस्तियों से भी अपेक्षा की जाती है कि वे सामाजिक हित के मुद्दों पर स्वेच्छा से योगदान दें, ताकि नागरिकों के पैसे का इस्तेमाल जागरूकता और प्रदूषण नियंत्रण के व्यापक प्रयासों में किया जा सके।

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