● केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने पूछा है कि एक नल का खर्च 30 हजार से बढ़कर 1 लाख 37 हजार तक कैसे पहुंचा?
● माधव भंडारी की भी तहव्वूर राणा के साथ पूछताछ होनी चाहिए, जब तक जांच न हो तब तक अजित पवार को मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया जाए।
● हिंदी थोपने के पीछे भाजपा की बड़ी साजिश, पहले गुजरात में लागू करे हिंदी।
मुंबई वार्ता संवाददाता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ी धूमधाम से जल जीवन मिशन की घोषणा करते हुए कहा था कि 2024 तक देश के हर घर में नल के माध्यम से शुद्ध पीने का पानी मिलेगा। लेकिन 2025 आ गया और महाराष्ट्र आज भी प्यासा है। पानी के लिए महिलाओं को लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है और संघर्ष करना पड़ रहा है। इस योजना में हुआ भ्रष्टाचार महिलाओं की जान ले रहा है, ऐसा तीखा हमला महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने किया।


तिलक भवन में आयोजित पत्रकार परिषद में बोलते हुए उन्होंने राज्य में पानी की भारी किल्लत को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि बड़ी-बड़ी घोषणाएं होती हैं लेकिन अमल नहीं होता, यह फिर से साबित हो गया है।
“हर घर नल, हर नल जल” का नारा नरेंद्र मोदी बार-बार देते रहे। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार ने जल जीवन मिशन योजना शुरू की, लेकिन खुद केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने माना है कि भ्रष्टाचार हुआ है और एक नल की लागत 30 हजार से बढ़कर 1 लाख 37 हजार कैसे हुई, इसका स्पष्टीकरण मांगा गया है।इस योजना का लाभ सिर्फ अधिकारियों और ठेकेदारों को हुआ है। महिलाएं अब भी पानी के लिए संघर्ष कर रही हैं। यवतमाल जिले में पानी लाने गई एक बच्ची की मौत हो गई। नाशिक जिले में महिलाओं को पानी भरने के लिए जान जोखिम में डालकर कुएं में उतरना पड़ता है। इससे स्पष्ट होता है कि जल जीवन मिशन भ्रष्टाचार की बलि चढ़ गया है। अब तो केंद्र सरकार ने इस योजना की निधि में 47 प्रतिशत की कटौती कर दी है, जिससे आने वाले वर्षों में काम नहीं हो पाएंगे और महिलाओं की प्यास की यह पीड़ा जारी रहेगी।
● माधव भंडारी की भी जांच होनी चाहिए
हर्षवर्धन सपकाल ने गंभीर आरोप लगाया कि मुंबई पर हुए 26/11 के आतंकवादी हमले के संबंध में भाजपा प्रवक्ता माधव भंडारी के बयान की हम निंदा करते हैं। इस हमले का आरोपी डेविड कोलमेन हेडली अब भी फरार है, लेकिन तहव्वूर राणा को प्रत्यर्पित कर मुंबई लाया गया है। माधव भंडारी को हिरासत में लेकर राणा के साथ पूछताछ की जाए।
उस समय सरकार में शामिल कई नेता अब भाजपा में हैं। अजित पवार समेत कई नेता तब भी मंत्रिमंडल में थे और अब भी हैं। इसलिए अजित पवार को मंत्रिमंडल से हटाकर उनकी भी जांच की जाए। राष्ट्रहित की बात करने वाले भाजपा नेताओं का असली चेहरा जनता के सामने आएगा, ऐसा सपकाल ने कहा।
■ हिंदी थोपने के पीछे बड़ा षड्यंत्र
हर्षवर्धन ने कहा कि पहली कक्षा से ही हिंदी थोपना एक बहुत बड़ा षड्यंत्र है। यह मराठी भाषा और संस्कृति को खत्म करने की साजिश है। छत्रपति शिवाजी महाराज के हिंदवी स्वराज्य की मराठी भाषा को खत्म करने का यह प्रयास है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक गोलवलकर की किताब “बंच ऑफ थॉट्स” में जो लिखा गया है, उसी को आज सरकार अमल कर रही है। हिंदी थोपने की शुरुआत पहले गुजरात में की जानी चाहिए। पहली कक्षा से तीन भाषाएं अनिवार्य करना अवैज्ञानिक है। इसका बोझ बच्चों पर भारी पड़ेगा। सरकार ने इस पर कोई विचार नहीं किया है। भाषा सलाहकार समिति ने इस फैसले का विरोध किया है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है। उन्हें चीजें थोपने का शौक है, लेकिन उन्हें यह निर्णय वापस लेना चाहिए, हमारी यह मांग बनी हुई है।
पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि संग्राम थोपटे का निर्णय आत्मघाती है। कांग्रेस पार्टी ने उन्हें विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए नामित किया था, लेकिन देवेंद्र फडणवीस ने तब चुनाव ही नहीं होने दिया। जिससे उनकी वह संभावना खत्म हो गई थी। अब वे उन्हीं लोगों के पास जा रहे हैं जिन्होंने उनके साथ विश्वासघात किया।


