■ विधायक संजय उपाध्याय ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर की मांग; कहा- 30 दिन में परीक्षा पास करना हजारों चालकों के लिए मुश्किल।
मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई और बोरीवली विधानसभा क्षेत्र के हजारों ऑटो-रिक्शा एवं टैक्सी चालकों को मराठी भाषा सीखने और परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए अतिरिक्त समय देने की मांग को लेकर विधायक संजय उपाध्याय ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा है। उन्होंने चालकों को कम से कम 12 महीने की अतिरिक्त मोहलत देने की मांग की है।


मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में विधायक उपाध्याय ने कहा है कि राज्य सरकार ने सार्वजनिक परिवहन सेवा में मराठी भाषा को अनिवार्य करने का निर्णय लिया है, जिसका वे स्वागत करते हैं। उनका कहना है कि सभी परिवहन चालकों को मराठी भाषा सीखनी चाहिए, लेकिन व्यावहारिक स्थिति को देखते हुए उन्हें पर्याप्त समय दिया जाना आवश्यक है।


पत्र के अनुसार, मुंबई और बोरीवली विधानसभा क्षेत्र सहित पूरे मुंबई में हजारों ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालक इस मुद्दे को लेकर उनसे मिल चुके हैं और अपनी समस्याएं बताई हैं। विधायक ने कहा कि करीब 70 प्रतिशत चालक अन्य राज्यों से हैं और उनमें से कई कम शिक्षित हैं। ऐसे में केवल 30 दिनों के भीतर मराठी भाषा की परीक्षा उत्तीर्ण करना उनके लिए काफी मुश्किल हो सकता है।
विधायक ने बताया कि परीक्षा पास नहीं कर पाने की स्थिति में चालकों के परमिट के नवीनीकरण पर असर पड़ रहा है। इससे उनकी आजीविका का संकट पैदा हो सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए चालकों को मराठी सीखने और परीक्षा की तैयारी के लिए कम से कम 12 महीने की अतिरिक्त अवधि देने का अनुरोध किया है।
■ परमिट रद्द करने या दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने की मांग
संजय उपाध्याय ने अपनी मांगों में यह भी कहा है कि अतिरिक्त मोहलत की अवधि के दौरान किसी भी चालक के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए और परमिट रद्द करने जैसी कार्रवाई भी न की जाए।
इसके अलावा उन्होंने परिवहन विभाग के माध्यम से आरटीओ स्तर पर नि:शुल्क मराठी भाषा प्रशिक्षण कक्षाएं शुरू करने की मांग की है, ताकि चालक आसानी से मराठी सीख सकें और परीक्षा की तैयारी कर सकें।
■ लिखित परीक्षा की जगह आसान मौखिक परीक्षा का सुझाव
विधायक ने चालकों के लिए लिखित परीक्षा के बजाय सरल मौखिक संवाद आधारित परीक्षा लेने का सुझाव भी दिया है। उनका कहना है कि ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों का यात्रियों से प्रत्यक्ष संवाद होता है, इसलिए उनके लिए दैनिक व्यवहार में इस्तेमाल होने वाली मराठी भाषा का ज्ञान अधिक महत्वपूर्ण है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है। उपाध्याय ने कहा कि यह मामला हजारों गरीब और मेहनतकश ऑटो-रिक्शा तथा टैक्सी चालकों की रोजी-रोटी से सीधे जुड़ा हुआ है, इसलिए नियम लागू करते समय उन्हें पर्याप्त समय और प्रशिक्षण की सुविधा मिलनी चाहिए।


