● घूमर इंडिया महोत्सव का मुख्य उद्देश्य स्तन कैंसर पर जागरूकता
मुंबई वार्ता/ हरीशचंद्र पाठक

भारतीय सांस्कृतिक और प्राचीन परंपराओं की घूमर नृत्य का अनोखा संगम घाटकोपर के आर सिटी मॉल के कोर्टयार्ड में देखने को मिला l घूमर इंडिया लोक महोत्सव में संगीत और परंपरा की जीवंत टेपेस्ट्री में बदल दिया। इस आयोजन का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य, बालिका शिक्षा और स्तन कैंसर के रोक थाम के लिए लोगों को जागरूक करना था.
घूमर इंडिया लोक महोत्सव, संस्कृति और परंपरा का एक सहज संगम है, जो भारतीय महिला उद्यमी अंतर्राष्ट्रीय चैंबर की निदेशक डॉ. ममता अजीत सिंह के दिमाग की उपज है। रेहमा नाहर, स्वाति ठक्कर और शिल्पा जैन के साथ, उन्होंने एक ऐसे उत्सव की कल्पना की जो न केवल परंपरा का सम्मान करता है बल्कि सार्थक सामाजिक कारणों का भी समर्थन करता है।
घूमर नृत्य भारत की सांस्कृतिक का हिस्सा है , शानदार कार्यक्रम संस्कृति, मनोरंजन और जीवन शैली को फिर से परिभाषित करना जारी रखेगा। जैसे-जैसे घूमर की गूँज फीकी पड़ती जा रही है, शहर के निवासी बेसब्री से इंतजार करते हैं l
● कैसे हुई घूमर नृत्य की शुरुआत ?
घूमर भील जनजाति की देवी सरस्वती की पूजा करने के लिए किया जाने वाला नृत्य है, जिसे अन्य राजस्थानी समुदायों ने भी अपनाया। भील उस समय एक मजबूत समुदाय थे और राजपूत राजाओं के साथ लगातार युद्ध में साथ देते थे। उस समय में घूमर नृत्य राजस्थान में स्थानीय महिलाओं द्वारा किया जाता था, बाद में राजपूत कुलीन महिलाओं ने भी नृत्य में भाग लेना शुरू कर दिया। पुरुषों को इन नृत्य प्रदर्शनों में अनुमति नहीं थी।
घूमर इंडिया लोक महोत्सव में दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने वाला घूमर डांस मैराथन, प्रसिद्ध राजस्थानी बैंड द्वारा आत्मा को झकझोर देने वाला है l यहां के रैंप पर राजपूत दुल्हन और दूल्हे की पोशाक की शान को दिखाया गया . पद्मश्री मामे खान के शानदार प्रदर्शन के साथ यह उत्सव अपने चरम पर पहुंच गया, कोक स्टूडियो के “चौधरी” गाने पर उनकी प्रस्तुति ने प्रांगण को राजस्थान की लोक परंपराओं के लिए जीवंत श्रद्धांजलि में बदल दिया। पद्मावत में घूमर के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता ज्योति डी तोमर, प्रसिद्ध नृत्य कोरियोग्राफर देवेश मीरचंदानी और मुंबई गरबा के ढोल किंग नैतिक नागदा सहित कई प्रसिद्ध मेहमानों की उपस्थिति ने शाम को और भी शानदार बना दिया था.


