मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई के वसई इलाके के पोमण में बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन में बड़ा घोटाला सामने आया है। जमीन पर फर्जी मालिकाना हक दिखाकर और वाटणी पत्र (बंटवारा समझौते) का उल्लंघन कर शासन के करोड़ों रुपये हड़पने का मामला उजागर हुआ है। इस प्रकरण में नायगांव पुलिस थाने में बुधवार को मामला दर्ज किया गया है।


जानकारी के अनुसार, पोमण स्थित सर्वे नंबर 164, हिस्सा नंबर 1/2 की जमीन वर्ष 2018 से 2022 के बीच बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थी। यह जमीन रॉयल एंड हब कंपनी के नाम पर थी, जिसमें दो भागीदार थे। कंपनी के एक भागीदार पद्मश्री कल्याणजी गजरा (60) की शिकायत के आधार पर यह मामला सामने आया।
आरोप है कि दूसरे भागीदार हरीश भानुशाली ने समझौते का दुरुपयोग कर जमीन पर अपनी झूठी मालिकाना हक दर्शाते हुए फर्जी दस्तावेज तैयार किए। इस पूरे घोटाले में कुछ अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आई है। वसई-विरार महानगरपालिका और भूमी अभिलेख विभाग के कुछ अधिकारियों पर भी संलिप्तता के आरोप हैं।
पुलिस जांच में यह सामने आया है कि फर्जी घरपट्टी, बिजली बिल और अन्य कागजात तैयार कर जमीन का निरीक्षण भी दिखाया गया, जिससे दस्तावेजों को वैध साबित किया जा सके। 6,567 वर्गफुट जमीन के बंटवारे में धोखाधड़ी कर करीब 3 करोड़ 56 लाख रुपये का गबन किया गया।
नायगांव पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संजय हजारे ने बताया कि दस्तावेजों की जांच में आरोपी और संबंधित अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट हुई है। मामले की आगे जांच जारी है और अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।


