भारत सरकार द्वारा ‘छठ’ को यूनेस्को की विरासत सूची में शामिल कराने का प्रयास, कमिटी में मनोज भावुक शामिल।

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मुंबई वार्ता/राजेश विक्रांत

सूर्य से दुनिया है और दुनिया का सबसे अनोखा पर्व है छठ. भारत सरकार ‘छठ महापर्व’ को यूनेस्को की मानवता की अमूर्त विरासत की सूची (UNESCO Representative List of Intangible Cultural Heritage of Humanity) में शामिल कराने का प्रयास कर रही है।

भारत सरकार के इस महत्वपूर्ण पहल के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त भोजपुरी साहित्यकार मनोज भावुक को भी शामिल किया गया है। मनोज भावुक ने बताया कि ‘’ मॉरीशस का गीत-गवाई यूनेस्को में सांस्कृतिक विरासत के रूप में शामिल हो चुका है. अब महापर्व छठ के लिए प्रयास जारी है जिसमें भारत व गिरमिटिया देशों के अलावा दुनिया के सभी देशों में बसे एनआरआई (पूर्वांचली) लोगों ने भी मुहिम शुरू कर दी है. चूकि छठ अब एक वैश्विक पर्व बन गया है, छठ के समय पूरी दुनिया में एक बिहार नजर आता है, इसलिए दुनिया भर के बिहारियों (पूर्वांचलियों) ने इस दिशा में प्रयास करना शुरू कर दिया है. भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और संगीत नाटक अकादमी द्वारा छठ से जुड़े सभी सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं का दस्तावेजीकरण किया जा रहा है, ताकि जब यह प्रस्ताव यूनेस्को के पास जाए, तो उसे तुरंत स्वीकृति मिल जाए.”भोजपुरी भाषा के लिए मनोज भावुक ने देश-विदेश की यात्रा की है, गिरमिटिया देशों में भी गए हैं।

हाल ही में NIOS (The National Institute of Open Schooling ) में भोजपुरी की ऑनलाइन पढ़ाई के संदर्भ में हुई विशेषज्ञों की मीटिंग में बतौर पैनलिस्ट व विशिष्ट अतिथि भावुक ने बताया कि उन्होंने विश्व भर के भोजपुरी एक्टिविस्ट, इन्फ्लुएंसर, साहित्यकार, कलाकार, समाजसेवी, गायक और सम्बंधित संस्थाओं का एक डेटाबेस तैयार किया है जो अपने-अपने देशों में भोजपुरी को लेकर जागरूकता पैदा करेगें और डिजिटल प्लेटफार्म पर इंटरनेशनल नेटवर्किंग और साहित्यिक-सांस्कृतिक-सामाजिक-व्यवसायिक साझेदारी में सहयोग करेगें।

भारत सरकार के छठ से जुड़ी इस समिति का हिस्सा बनने पर खुशी ज़ाहिर करते हुए मनोज भावुक ने कहा कि ‘ हम छठ पूजा देखते और छठ गीत सुनते बड़े हुए हैं. हमारे दुख के उबार के लिए माई ने छठी मइया से कई बार भारा भी भाखा है (मन्नत माँगा है ). बाद में विदेशों में भी छठ पूजा में शामिल होने का सौभाग्य मिला है. अफ्रीका में भोजपुरी असोसिएशन ऑफ़ युगांडा (2005) की स्थापना कर विक्टोरिया लेक के किनारे छठ पूजा की शुरुआत कराई हमने और लंदन में भोजपुरी समाज ( 2006 ) की स्थापना कर. बाद में टीवी चैनल्स से जुड़ने पर छठ पर केंद्रित अनेक शोज किये. बतौर ‘सारेगामापा’ प्रोजेक्ट हेड और राइटर छठ पर स्पेशल शोज लिखा और बनाया।

बतौर संपादक ‘भोजपुरी जंक्शन’ छठ पर विशेषांक निकाला और अख़बारों व पोर्टल्स में छठ केंद्रित अनेक फीचर व ब्लॉग्स लिखा. छठ पर मेरे लिखे गीतों को अनेक स्थापित गायकों ने गाया है तो भारत सरकार के इस छठ कमिटी का हिस्सा बनना मेरे लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और इस जिम्मेदारी के लिए भारत सरकार का शुक्रगुजार हूँ। जात-पात, अमीरी-गरीबी, पंडित-पुरोहित, स्त्री-पुरुष के बंधन से मुक्त …सामूहिकता, सामुदायिकता, एकजुटता, भाईचारा को बढ़ावा देने … पर्यावरण व जल संरक्षण का संदेश देने … और उगते ही नहीं, डूबते सूरज को भी पूजने वाले सूर्य उपासना के इस महापर्व को यूनेस्को में हेरिटेज के रूप में शामिल कराने के लिए मुझसे जो भी बन पड़ेगा, अवश्य करूँगा।’’

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