मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के विभाग प्रमुख गणेश अर्जुन चुक्कल को पवई में एक आलीशान फ्लैट से जुड़े कथित फर्जी लीज डीड और धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया गया है। मुंबई क्राइम ब्रांच की यूनिट-10 ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की। एस्प्लेनेड अदालत ने उन्हें 23 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। मामले में फिल्म निर्माता अलका भाटिया हिरानंदानी, जो अभिनेता अक्षय कुमार की बहन हैं, के कथित फर्जी हस्ताक्षर की जांच की जा रही है। पुलिस को हस्तलेखन विशेषज्ञ की रिपोर्ट का इंतजार है।


■ तीन साल के लीज समझौते को 30 साल का बनाने का आरोप
यह मामला पवई के हीरानंदानी गार्डन्स स्थित एडोनिया इमारत के एक आलीशान फ्लैट और दो पार्किंग स्थलों से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, यह संपत्ति मेलरोनिया हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड की है। कंपनी के निदेशकों में अलका भाटिया हिरानंदानी और अन्य लोग शामिल हैं।पुलिस के मुताबिक, गणेश चुक्कल ने वर्ष 2018 में अपनी कंपनी ब्राइस इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक रहते हुए यह फ्लैट 36 महीने के लिए लीज पर लिया था। समझौते के तहत 15.30 लाख रुपये की सुरक्षा जमा राशि और 2.55 लाख रुपये मासिक किराया तय किया गया था।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि अक्टूबर 2019 से किराया मिलना बंद हो गया। इसके बाद कंपनी ने समझौता समाप्त कर फ्लैट खाली करने को कहा। आरोप है कि चुक्कल ने फ्लैट खाली करने के बजाय 30 साल की लीज का दावा करते हुए कथित विवादित दस्तावेज अधिकारियों के सामने पेश किए।### दस्तावेजों और हस्ताक्षरों की जांचपुलिस के अनुसार, जांच के दौरान एक कथित लीज डीड में कई विसंगतियां सामने आईं।
आरोप है कि मूल तीन साल के लीज समझौते की अवधि में बदलाव कर उसे 30 साल का दिखाया गया। दस्तावेज पर अलका भाटिया हिरानंदानी सहित कंपनी के अन्य निदेशकों के हस्ताक्षर भी कथित रूप से फर्जी होने का संदेह है।जांचकर्ताओं ने मीरा रोड के एक स्टांप विक्रेता के रिकॉर्ड की भी जांच की। पुलिस का दावा है कि स्टांप पेपर बिक्री रजिस्टर में कुछ प्रविष्टियों में बदलाव के संकेत मिले हैं। संबंधित रजिस्टर को जांच के लिए जब्त किया गया है।पुलिस ने अलका भाटिया हिरानंदानी के नमूना हस्ताक्षर हस्तलेखन विशेषज्ञ के पास भेजे हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद दस्तावेजों की प्रामाणिकता के बारे में जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
■ पहले भी अदालत में पहुंचा था मामला
कंपनी ने संपत्ति खाली कराने के लिए सक्षम प्राधिकरण का दरवाजा खटखटाया था। नवंबर 2021 में प्राधिकरण ने चुक्कल की राहत मांगने वाली याचिका खारिज कर कंपनी के पक्ष में आदेश दिया। बाद में जून 2022 में अपीलीय प्राधिकरण ने भी उनके आवेदन को खारिज करते हुए पहले के आदेश को बरकरार रखा।इस मामले में पवई पुलिस ने धोखाधड़ी और जालसाजी से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। जांच एजेंसियां अब कथित फर्जी दस्तावेज तैयार करने में शामिल अन्य लोगों, स्टांप पेपर के स्रोत और संबंधित हस्ताक्षरों की जांच कर रही हैं।


