मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के बार, होटल और मदिरा कक्षों (बार रूम) में ‘ऑर्केस्ट्रा’ के नाम पर चल रही कथित अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। गृह विभाग द्वारा सोमवार को जारी आदेश के अनुसार अब महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, 1951 के तहत प्रत्यक्ष संगीत प्रस्तुति (ऑर्केस्ट्रा) के लिए नए लाइसेंस जारी नहीं किए जाएंगे। साथ ही, पहले से जारी ऑर्केस्ट्रा लाइसेंसों का नवीनीकरण भी नहीं किया जाएगा।
यह निर्णय राज्य विधानसभा के मानसून सत्र में संबंधित विधेयक पारित होने के बाद लागू किया गया है।


सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब ऑर्केस्ट्रा से जुड़े सभी लाइसेंस केवल ‘महाराष्ट्र होटल, उपाहारगृह एवं मदिरा कक्ष (बार रूम) में अश्लील नृत्य पर प्रतिबंध तथा वहां कार्यरत महिलाओं की गरिमा की सुरक्षा अधिनियम, 2016’ के तहत ही जारी किए जाएंगे।


■ क्या होगा असर?
सरकार के इस फैसले के बाद बार और होटल व्यवसाय के लिए नई नियामक व्यवस्था लागू होगी। ऑर्केस्ट्रा की आड़ में आयोजित किए जाने वाले नृत्य कार्यक्रमों पर सख्त नियंत्रण रहेगा और संचालकों को वर्ष 2016 के कानून में निर्धारित सभी शर्तों और नियमों का पालन करना होगा।
सरकार का कहना है कि 2016 का डांस बार कानून लागू होने के बाद डांस परफॉर्मेंस के लाइसेंसों की संख्या काफी कम हो गई थी, लेकिन कई स्थानों पर ‘लाइव म्यूजिक (ऑर्केस्ट्रा)’ लाइसेंस का इस्तेमाल वैकल्पिक रास्ते के रूप में किया जा रहा था। ऑर्केस्ट्रा के नाम पर नृत्य कार्यक्रम आयोजित किए जाने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं, जिससे डांस बार कानून का उद्देश्य प्रभावित हो रहा था।
■ 2016 का कानून क्या है?
महाराष्ट्र सरकार ने वर्ष 2005 में डांस बार पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया था, लेकिन मामला बाद में सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा। न्यायालय के विभिन्न फैसलों के बाद राज्य सरकार ने वर्ष 2016 में नया कानून बनाया।
इस कानून के तहत अश्लील नृत्य पर प्रतिबंध लगाया गया, जबकि निर्धारित शर्तों और नियमों का पालन करने पर सीमित दायरे में नृत्य प्रस्तुतियों की अनुमति दी गई। अब राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि ऑर्केस्ट्रा से संबंधित सभी अनुमति इसी कानून के प्रावधानों के तहत दी जाएगी।


