मुंबई वार्ता संवाददाता

एकनाथ शिंदे द्वारा मुंबई को झोपड़पट्टी-मुक्त और ड्रग्स-फ्री बनाने की घोषणाओं पर कड़ा प्रहार करते हुए सुरेशचंद्र राजहंस ने इन्हें महज़ “खोखले दावे” बताया है। उन्होंने कहा कि 2014 से सत्ता में रहने और पिछले 25 वर्षों तक बीएमसी में प्रभाव रखने के बावजूद मुंबई की बदहाली दूर नहीं हुई, बल्कि शहर को और बर्बाद किया गया।


राजहंस ने कहा कि शहरी विकास विभाग स्वयं एकनाथ शिंदे के पास होने के बावजूद आम मुंबईकरों के घर का सपना पूरा नहीं हो सका। भाजपा-महायुति सरकार झोपड़पट्टीवासियों के हित में काम करने के बजाय एसआरए जैसे प्रोजेक्ट्स के जरिए बिल्डरों के फायदे साध रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि झोपड़पट्टियों को हटाने के नाम पर गरीब-मेहनतकश लोगों के घरों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें बेघर किया जा रहा है।
उन्होंने पवई के जयभीम नगर में झोपड़पट्टियां हटाने का उदाहरण देते हुए कहा कि सैकड़ों गरीब परिवार सड़कों पर आ गए, जिससे सरकार का बिल्डर-परस्त चेहरा उजागर हुआ। झोपड़पट्टियों के मुद्दे पर उच्च न्यायालय द्वारा सरकार की कड़ी टिप्पणी भी इस विफलता को दर्शाती है।
ड्रग्स-फ्री मुंबई की घोषणा पर सवाल उठाते हुए राजहंस ने कहा कि आज मुंबई में खुलेआम ड्रग्स उपलब्ध हैं और इसका असर स्कूली बच्चों तक पहुंच चुका है। भाजपा-महायुति शासनकाल में ड्रग्स का अवैध कारोबार तेजी से बढ़ा है। उन्होंने सातारा जिले में पकड़े गए बड़े ड्रग्स भंडार का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि इसके तार सत्ता तक पहुंचते हैं। ऐसे में ड्रग्स-फ्री मुंबई की बात करना जनता को गुमराह करने जैसा है।
राजहंस ने आरोप लगाया कि भाजपा-महायुति की मंशा मुंबई को लूटने की है और नए-नए तरीकों से मुंबईकरों के पैसे पर डाका डालने की तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा कि इस सरकार को मुंबईकरों की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है।


