श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

एक ही इलाके में स्थित गगनचुंबी इमारतों और झोपड़पट्टियों के लिए समान रेडी रेकनर दर लागू होने से आम नागरिकों को होने वाली परेशानी को दूर करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब उपलब्ध सुविधाओं और विकास के स्तर के आधार पर अलग-अलग रेडी रेकनर दर निर्धारित किए जाएंगे। इसके लिए मुंबई में ‘माइक्रो जोनिंग’ सर्वेक्षण शुरू किया गया है और इस कार्य के लिए महाराष्ट्र रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (एमआरएसएसी) की नियुक्ति की गई है।


राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर इस निर्णय की घोषणा की। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर राज्य में तीन चरणों में माइक्रो जोनिंग सर्वेक्षण अभियान चलाया जाएगा।
राजस्व विभाग की योजना के अनुसार सर्वेक्षण पूरा होने के बाद अगले वित्तीय वर्ष से इस नई व्यवस्था को लागू किया जाएगा। इसके बाद अगले दो वर्षों में राज्य के अन्य महानगरों में भी इसे लागू किया जाएगा।
मंत्रालय में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सुझावों के अनुरूप ‘महाराष्ट्र मुद्रांक (द्वितीय संशोधन) शासकीय विधेयक क्रमांक-9’ के तहत इस योजना की रूपरेखा पर चर्चा की गई।
मुंबई के लिए विशेष रूप से ‘माइक्रो जोनिंग’ प्रणाली अपनाई जाएगी। वर्ष 2027-28 के वार्षिक मूल्य दर तय करते समय सिटी सर्वे नंबर और क्षेत्र के विकास के स्वरूप को ध्यान में रखा जाएगा। अब तक एक ही क्षेत्र में स्थित झोपड़पट्टियों, चॉलों और उच्चस्तरीय आवासीय सोसायटियों पर समान दर लागू होने से असमानता पैदा होती थी। नई व्यवस्था के तहत उपलब्ध सुविधाओं के अनुसार अधिक यथार्थवादी और न्यायसंगत दर निर्धारित किए जाएंगे।
पूरे महाराष्ट्र में शहरी, ग्रामीण और प्रभाव क्षेत्र का सटीक डेटा एकत्र करने के लिए एमआरएसएसी के माध्यम से जीआईएस आधारित नक्शे तैयार किए जाएंगे। राज्य के निबंधन महानिरीक्षक कार्यालय द्वारा हर वर्ष संपत्ति पंजीकरण के लिए वार्षिक मूल्य दर प्रकाशित किए जाते हैं।
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि इस फैसले से रेडी रेकनर दरों में अधिक पारदर्शिता आएगी और मुंबई जैसे महानगरों में सामान्य नागरिकों, मध्यम वर्ग और झोपड़पट्टीवासियों को संपत्ति लेन-देन में बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि मुंबई के बाद राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी दो चरणों में माइक्रो जोनिंग व्यवस्था लागू की जाएगी।


