मुंबई वार्ता संवाददाता

केंद्र सरकार ने देशभर के व्यापारियों को बड़ी राहत देते हुए मापन उपकरणों के सत्यापन नियमों में अहम बदलाव किया है। अब सभी प्रकार के मापन उपकरणों का सत्यापन एक समान अवधि यानी 24 महीनों (दो वर्ष) के लिए मान्य होगा। इस फैसले से व्यापारियों को बार-बार नवीनीकरण और दंडात्मक कार्रवाई की चिंता से मुक्ति मिलेगी।


कॉन्फडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय मंत्री एवं अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने बताया कि अब तक विधिक मापन शास्त्र कानून के तहत विभिन्न उपकरणों के लिए सत्यापन की अवधि अलग-अलग निर्धारित थी। इससे व्यापारियों को बार-बार सत्यापन और नवीनीकरण कराना पड़ता था। समय पर सत्यापन न होने की स्थिति में जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का जोखिम भी बना रहता था।
व्यापारियों और उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने विधिक मापनशास्त्र (जनरल) सातवाँ संशोधन नियम, 2025 अधिसूचित किया है। यह संशोधन विधिक मापनशास्त्र अधिनियम, 2009 के अंतर्गत किया गया है और राजपत्र में प्रकाशित होने की तिथि से लागू हो चुका है।संशोधित नियमों के तहत विधिक मापनशास्त्र (जनरल) नियम, 2011 के नियम क्रमांक 27 में बदलाव किया गया है।
इसके अनुसार अब सभी प्रमुख मापन उपकरणों के लिए सत्यापन की वैधता सीधे 24 महीने निर्धारित कर दी गई है। इसमें वजन मापने के सभी उपकरण, क्षमता माप (लीटर, मिलीलीटर आदि), लंबाई माप, मापपट्टियां, बीम स्केल, काउंटर मशीनें और पेट्रोल-डीजल ईंधन वितरण मशीनें शामिल हैं।


