■ मुंबई युवक कांग्रेस द्वारा “शहरी कामगार न्याय अभियान” और “मुंबई का हक” अभियान की घोषणा
मुंबई वार्ता संवाददाता

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई को खड़ा करने वाले लाखों शहरी कामगार आज भी असुरक्षित, असंगठित और शोषणपूर्ण परिस्थितियों में जीवन जीने को मजबूर हैं। सफाई कर्मचारी, घरेलू कामगार, ऑटो-रिक्शा चालक, फेरीवाले और असंगठित क्षेत्र के कामगारों को सरकार मूलभूत अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन से वंचित रख रही है, ऐसा गंभीर आरोप मुंबई युवक कांग्रेस की अध्यक्षा ज़ीनत शबरीन ने लगाया।


मुंबई कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार परिषद में ज़ीनत शबरीन, युवक कांग्रेस के प्रभारी पुनित सिंह परिया तथा युवक कांग्रेस पदाधिकारियों ने “शहरी कामगार न्याय अभियान” की शुरुआत की। साथ ही “मुंबई का हक” अभियान के तहत मुंबई की भ्रष्ट और निष्क्रिय व्यवस्था के खिलाफ सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने की चेतावनी भी दी।ज़ीनत शबरीन ने कहा कि शहर खड़ा करने वाले कामगारों को आज भी न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, कानूनी संरक्षण और सम्मान नहीं मिल रहा है। नए श्रम कानूनों में घरेलू कामगारों, गिग वर्कर्स और असंगठित क्षेत्र के अनेक वर्गों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।


उन्होंने कहा कि कानूनी प्रतिबंध के बावजूद आज भी सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई करते समय सफाई कर्मचारियों की मौत हो रही है। उन्हें सुरक्षा उपकरण तक उपलब्ध नहीं कराए जाते और मृत कर्मचारियों के परिवारों को न्याय तथा मुआवजा नहीं मिलता। उन्होंने मैनुअल स्कैवेंजिंग पूरी तरह बंद करने तथा सभी सफाई कर्मचारियों को स्थायी सरकारी नौकरी, स्वास्थ्य बीमा और सामाजिक सुरक्षा देने की मांग की।
घरेलू कामगारों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि आज भी कई महिला घरेलू कामगारों को अलग लिफ्ट, अलग गेट और अलग शौचालय जैसी आधुनिक अस्पृश्यता का सामना करना पड़ता है। उन्हें न्यूनतम वेतन, साप्ताहिक अवकाश, मातृत्व लाभ और कानूनी संरक्षण से वंचित रखा जाता है। युवक कांग्रेस ने घरेलू कामगारों के लिए अलग कानून, ₹100 प्रति घंटे न्यूनतम वेतन, स्वास्थ्य बीमा, पेंशन और भेदभाव विरोधी सख्त कानून की मांग की। ऑटो और रिक्शा चालकों को ऐप कंपनियों की लूट, पुलिस उत्पीड़न, बढ़ते चालान और अधिकृत स्टैंड की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उनके लिए अलग कल्याणकारी बोर्ड, बीमा, पेंशन, गैस सब्सिडी और ऐप कमीशन पर नियंत्रण की मांग भी की गई।
फेरीवालों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, “सौंदर्यीकरण के नाम पर गरीबों का रोजगार छीना जा रहा है। जब्ती, अवैध वसुली और पुलिस उत्पीड़न के कारण लाखों फेरीवाले असुरक्षित हो गए हैं।” उन्होंने स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट के सख्त पालन, वेंडिंग ज़ोन, व्यवसाय प्रमाणपत्र और महिला विक्रेताओं के लिए मूलभूत सुविधाओं की मांग की।ज़ीनत शबरीन ने आगे कहा कि हजारों करोड़ रुपये का बजट होने के बावजूद मुंबईकरों को गड्ढामुक्त सड़कें, बाढ़मुक्त शहर, स्वच्छ हवा, बेहतर सार्वजनिक परिवहन और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। “ट्रिपल इंजन सरकार” के दौर में मुंबई में रहना, काम करना और सांस लेना तक मुश्किल हो गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बाढ़ नियंत्रण, नाला सफाई, ड्रेनेज और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है। सड़कों पर चल रहे काम, बड़े निर्माण प्रकल्प और धूल प्रदूषण मुंबईकरों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहे हैं। उन्होंने लोकल ट्रेन, BEST बस सेवा और महानगरपालिका अस्पतालों की बदहाल स्थिति पर भी सरकार को घेरा।“यह अभियान केवल आंदोलन नहीं, बल्कि शहर खड़ा करने वाले कामगारों के सम्मान, समानता और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई है। मुंबईकरों का सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार खतरे में है और युवक कांग्रेस नागरिकों की आवाज बनकर सड़कों पर उतरेगी,” ऐसा ज़ीनत शबरीन ने कहा।
ज़ीनत शबरीन और पुनित सिंह परिया ने शहरी कामगारों और मुंबईकरों से 9811867474 नंबर पर मिस्ड कॉल देकर बड़ी संख्या में अभियान से जुड़ने की अपील की।


