मुंबई वार्ता/सतीश सोनी

आगामी चुनावों के मद्देनज़र, फर्जी मतदाताओं का मुद्दा सामने आया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पहले ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया था। अब शिवसेना का शिंदे गुट भी फर्जी मतदाताओं की चपेट में आता दिख रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अवधारणा पर आधारित एक विशेष ऐप बनाया गया है। इस ऐप के ज़रिए मतदाता सूची में शामिल हर फर्जी मतदाता पर कड़ी नज़र रखी जाएगी।


इस ऐप का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची में अनियमितताओं का पता लगाना है। इस ऐप के ज़रिए मतदाता सूची में मतदाताओं के पते, नाम और पंजीकरण की जाँच की जाएगी। इसके अलावा, यह भी जाँच की जाएगी कि एक ही पते पर एक से ज़्यादा मतदाता पंजीकृत तो नहीं हैं।


शिंदे गुट को अंदरूनी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कुछ जगहों पर फर्जी इमारतों के पते दिखाकर बड़ी संख्या में फर्जी मतदाता खड़े किए गए हैं। उम्मीद है कि इस ऐप की मदद से ऐसे फर्जी मतदाताओं का पता लगाना आसान होगा।इस डिजिटल रणनीति के तहत, शिवसेना ने अपने पदाधिकारियों को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। उन्हें अगले 15 दिनों में ज़्यादा से ज़्यादा सक्रिय सदस्यों का पंजीकरण करने का आदेश दिया गया है। साथ ही, उन्हें प्राथमिक सदस्य पंजीकरण पर भी ध्यान केंद्रित करने को कहा गया है।
शिंदे समूह का उद्देश्य इस अभियान के ज़रिए न केवल फर्जी मतदाताओं का पता लगाना है, बल्कि पार्टी के संगठनात्मक ढाँचे को भी मज़बूत करना है। इस ऐप को सफल बनाने के लिए एक विशेष ढाँचा बनाया गया है। यह पाँच स्तरों पर काम करेगा: अभियान प्रबंधक, बूथ सर्वेक्षण प्रमुख, सहयोगी बूथ सर्वेक्षण प्रमुख, सर्वेक्षक और पर्यवेक्षक। इन सभी पदाधिकारियों के ज़रिए बूथ स्तर पर हर मतदाता की जाँच की जाएगी।
अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो आने वाले दिनों में चुनावों में फर्जी मतदाताओं का प्रभाव कम होने की संभावना है।


