सदियों रहा है दुश्मन,दौर-ए-जमां हमारा।

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डाॅ धीरज फूलमती सिंह /स्तंभकार/मुंबई वार्ता

मुगल या दुसरे विदेशी आक्रांत जब भारत में युद्ध करते थे तो युद्ध के मैदान में गायों को आगे कर देते थे! उन्हे मालूम था कि भारत में गाय पूजनीय है। हम गायों को माता मानते है। ऐसे में गाय पूजनीय होने के कारण युद्ध के दौरान गायों की हत्या के पाप से बचने के लिए भारतीय राजा अपने हथियार डाल देते थे या पीछे हट जाते थे और इसी कमजोरी का फायदा उठा कर विदेशी आक्रांत युद्ध जीत जाते थे। आजकल पाकिस्तान भी इसी नीती पर काम कर रहा है। उसे पता है कि भारतीय सेना कभी भी मासूम नागरिकों को नुकसान नही पहुंचाएगी,इस लिए लडाई के इस माहौल में वह सामान्य नागरिक उड्डयन विमानो को रोका नही रहा है ताकि पाक को खत्म करने के लिए भारतीय सेना जोरदार हमला ना करे! जबकी वह खुद हर कायराना हरकत कर रहा है।

भारत को समझना चाहिए कि युद्ध का एक ही नियम होता है कि युद्ध का कोई नियम नही होता! सिर्फ जीत मायने रखती है। हारने वाले की नैतिकता और चरित्र की कोई तारीफ नही करता है और वह किसी काम की भी नही होती है। ऐसे में जब मैने कल सुना कि पाकिस्तान ने युद्ध विराम का प्रस्ताव रखा और भारत ने उसे मान लिया और इसका क्रेडिट अमेरिका ले रहा है तो मुझे बहुत निराशा हुई। मुझे लगा जैसे शायद पृथ्वीराज चव्हाण और मौहम्मद गौरी का इतिहास फिर से दोहराया जा रहा है।

मौहम्मद गौरी ने भारत के आखिरी हिंदू राजा पृथ्वीराज चव्हाण पर कई बार हमले किए,हारने के बाद माफी मांग लेता और महान पृथ्वीराज चव्हाण उसे माफ कर देते थे लेकिन जैसे ही मौहम्मद गौरी को जीत मिली,उसने पृथ्वीराज चव्हाण की निर्मम हत्या करवा दी! उसने माफ नही किया। पाकिस्तान ने भी भारत पर 1948 में हमला किया, 1965 और 1971 में भी वही किया। इन तीनों युद्ध में जीत तो भारत की हुई लेकिन भारत को मिला क्या ?

1948 में हमने जीत के बाद भी जम्मू-कश्मीर का एक तिहाई भाग खो दिया,जिसे आज पाक अधिकृत कश्मीर कहा जाता है। 1965 के युद्ध में हमने लाल बहादुर शास्त्री को खोया और 1971 की लडाई में जीत और 90 हजार से ज्यादा पाक सैनिको के आत्म समर्पण के बाद भी हम कश्मीर का खोया हुआ वह टुकड़ा वापस न ले सके उपर से शिमला समझौते का दाग लगा सो अलग! अटल बिहारी बाजपेई के नेतृत्व में भी हमने जुलाई 1999 में कारगिल युद्ध जीता था लेकिन सच्चाई तो यही है कि यह युद्ध भी हम पाकिस्तान द्वारा धोखे से कब्जाई हमारी ही जमीन वापस साहिल करने के लिए लडे थे। इसमे हार के बावजूद भी पाकिस्तान का क्या गया ? कुछ नही। लेकिन अपनी ही जमीन वापस पाने के लिए हमारे 500 से अधिक सैनिक मारे गए।

भारत ने पाकिस्तान के साथ चार बार युद्ध किया,हर बार हम ही जीते लेकिन इस जीत में हमने पाया क्या? कुछ नही! हर बार हमने कुछ ना कुछ खोया है! आपने दुनिया के युद्ध इतिहास में कभी पढा,सुना कि जीतने वाला हमेशा खाली हाथ मलता रहा ? इसलिए मैं चाहता हूँ कि इस बार भारत को मौका मिला है,अपनी गलती सुधारने का! पाकिस्तान मौहम्मद गौरी है,मौका मिला तो वह भारत की गर्दन दबोच लेगा! विकास की मत सोचो,विकास तो हाथ की मैल है! हम पिछड भी गये तो खत्म होने वाले नही है,विकास तो कभी भी फिर हासिल हो जाएगा।

सदियों रहा है दुश्मन,दौर-ए-जमा हमारा! इस गलत फहमी में मत रहों कि हम विकसित होगे तो हम पर कोई हमला नही कर सकता,हमे कोई गुलाम नही बना सकता ? अपना इतिहास पलट कर देख लो,गलत फहमी दूर हो जाएगी! हम दुनिया में विकसित देश थे लेकिन हम एक हजार वर्ष तक गुलाम रहे। हमे विदेशी आक्रान्ताओ द्वारा सैकडो बार लुटा खसोटा गया! .मेरे लिए भारत के विकास से ज्यादा महत्वपूर्ण है भारत का आत्म सम्मान और नागरिको का आत्म सम्मान से जीना! मुझे गैरतमंद हूँ,इसलिए मैं युद्ध के पक्ष में हूँ।

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