■ कांग्रेस ने मुख्यमंत्री को लिखा कड़ा पत्र.
मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई फायर ब्रिगेड की सीमित क्षमता के बावजूद 100 से अधिक मंज़िलों वाली गगनचुंबी इमारतों को दी जा रही मंज़ूरियों पर महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस समिति ने गंभीर आपत्ति जताई है। कांग्रेस नेता एवं पूर्व उपमहापौर राजेश शर्मा ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर इसे जनसुरक्षा से खिलवाड़ करार देते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।


पत्र में कहा गया है कि मुंबई फायर ब्रिगेड की परिचालन क्षमता लगभग 34 मंज़िलों तक ही सीमित है। स्वयं दमकल विभाग के अनुसार, अत्याधुनिक हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म भी अधिकतम 104 मीटर (लगभग 34–35 मंज़िल) तक ही पहुंच सकते हैं। इसके ऊपर आग बुझाने या बाहरी बचाव की कोई प्रभावी व्यवस्था मौजूद नहीं है। दमकल अधिकारियों के हवाले से यह भी उल्लेख किया गया है कि ऊपरी मंज़िलों में फंसे लोगों तक पहुंचना फिलहाल संभव नहीं है।


पत्र में आरोप लगाया गया है कि इस सार्वजनिक रूप से स्वीकार की गई सीमा की अनदेखी करते हुए 100 से अधिक मंज़िलों वाली इमारतों के प्रस्तावों को मंज़ूरी दी जा रही है या वे प्रक्रिया में हैं। उदाहरण के तौर पर वडाला की प्रस्तावित ‘आइकॉनिक टावर’ (100 से अधिक मंज़िल, 526 मीटर ऊंचाई) और महालक्ष्मी रेसकोर्स पुनर्विकास परियोजना के तहत 125 मंज़िला आवासीय टावर का उल्लेख किया गया है।
कांग्रेस का कहना है कि ऐसी मंज़ूरियां प्रशासनिक लापरवाही मात्र नहीं, बल्कि जनजीवन को जानबूझकर खतरे में डालने के समान हैं। पत्र में इसे “ऊर्ध्वाधर मृत्यु-जाल” बताते हुए कहा गया है कि यह महाराष्ट्र अग्नि निवारण एवं जीवन सुरक्षा उपाय अधिनियम, 2006 का स्पष्ट उल्लंघन है। चूंकि दमकल विभाग की अक्षमता रिकॉर्ड पर है, इसलिए सरकार और नगर प्रशासन अज्ञानता का दावा नहीं कर सकते।
पत्र में तीन प्रमुख मांगें रखी गई हैं—
1. 34 मंज़िल से ऊपर की सभी मंज़ूरियों को तब तक निलंबित किया जाए, जब तक दमकल क्षमता को ठोस रूप से उन्नत न किया जाए।
2. मौजूदा अग्नि-प्रतिक्रिया सीमा से अधिक ऊंची इमारतों के प्रस्तावों पर तत्काल रोक लगाई जाए।
3. 34 मंज़िल से ऊपर की सभी स्वीकृत इमारतों के अग्नि-सुरक्षा अनुमोदन, उपकरणों की पहुंच और आंतरिक सुरक्षा ऑडिट का सार्वजनिक खुलासा किया जाए।
कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो इसे नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में डालने में संस्थागत मिलीभगत माना जाएगा और इस मुद्दे को कानूनी व राजनीतिक दोनों स्तरों पर आगे बढ़ाया जाएगा।


