मुंबई वार्ता संवाददाता

अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कॉन्फडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय मंत्री शंकर ठक्कर ने बताया इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग के कारण पेट्रोलियम कच्चे तेलों के दाम में उछाल आने से खाद्य तेल जिसका इस्तेमाल कई देशों में बायोडीजल के रूप में किया जाता है , के दाम में भी उछाल आया है जिसके चलते आयतको ने 65,000 मीट्रिक टन कच्चे पाम तेल के सौदे रद्द किए हैं।
सूत्रों के मिली जानकारी के मुताबिक इंडस्ट्री ने जुलाई सितंबर के लिए कच्चे पाम तेल (CPO) का ऑर्डर कैंसल किया है।एक हफ्ते में पाम तेल 8% तक बढ़ चुका है। एक महीने पहले 8 महीनों के निचले स्तर पर पाम तेल के दाम थे। अचानक आए इस बड़े उछाल से ऑर्डर कैंसल हुआ है। इस उछाल के लिए युद्ध के अलावा अमेरिका बायोफ्यूल के प्रस्ताव भी एक बड़ा कारण है।
दूसरी तरफ देश में सबसे खाद्य तेल का आयात होता है व कांडला (दीनदयाल) पोर्ट पर जहाजों की लंबी कतार और बर्थिंग में देरी से इंडस्ट्री में चिंता गहराती जा रही है। व्यापारिक संगठनों ने आगाह किया है कि अगर पोर्ट पर जाम बना रहा, तो देश के प्रमुख उपभोग क्षेत्रों में खाद्य तेल की आपूर्ति बाधित हो सकती है।फिलहाल पोर्ट पर दो जहाज (करीब 45,000 टन) डिस्चार्ज हो रहे हैं, जबकि आठ जहाज (1.57 लाख टन) लंगर पर खड़े हैं और पांच और जहाज (1.59 लाख टन) इसी सप्ताह पहुंचने की तैयारी में हैं।मई में इम्पोर्ट ड्यूटी में कटौती के बाद खाद्य तेलों की आवक में अचानक उछाल आया है, जिससे बंदरगाह पर दबाव बढ़ गया है।
बर्थिंग के लिए औसतन 8–10 दिन का इंतजार हो रहा है, जो सूत्रों के अनुसार बढ़कर 15–20 दिन तक जा सकता है।व्यापारियों का कहना है कि कई जहाजों को आंशिक डिस्चार्ज के बाद बंदरगाह से हटाकर नए पोतों को जगह दी जा रही है, जिससे न केवल संचालन में देरी हो रही है बल्कि डेमरेज और स्टोरेज लागत भी बढ़ रही है।भारत हर महीने करीब 7.5 लाख टन पाम तेल आयात करता है, जिसमें से 25–30% आयात कांडला पोर्ट के ज़रिए होता है।
ऐसे में अगर यह जाम लंबे समय तक बना रहा, तो पश्चिम और उत्तर भारत में आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।फिलहाल बाजार की निगाहें कांडला बंदरगाह की स्थिति पर बनी हुई हैं। अगर जाम आगे भी इसी तरह बना रहा, तो आने वाले दिनों में आपूर्ति बाधित होने से बाजार कीमतों पर सीधा असर देखने को मिल सकता है।
शंकर ठक्कर ने आगे कहा अमेरिका के नए प्रस्ताव से 20% वेज ऑयल अब बायो फ्यूल के लिए इस्तेमाल होगा दूसरी तरफ ईरान इजरायल युद्ध और बंदरगाह पर लंबी कतारे जिसके चलते खाने के तेल की कीमतों में तेजी आई है और इन सब वजहों से आगे तेल का खेल खराब हो सकता है।


