●महाराष्ट्र पूरोगामी शिक्षक संगठना ने सरकार से मांग की.
मुंबई वार्ता/हरीशचंद्र पाठक
छात्र संख्या की कमी के कारण विद्यालयों से हटाए गए शिक्षकों एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों को प्रचलित नियमों के अनुसार अन्य विद्यालयों में समायोजित किया जाता है। इस वजह से हर साल अनेक शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी अतिरिक्त होते जा रहे हैं।
संस्था के सचिव संजय केवटे ने बताया कि प्रतिवर्ष अतिरिक्त शिक्षकों एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों की संख्या में वृद्धि हो रही है। समय पर समायोजन न होने के कारण अनेक अतिरिक्त शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारी निर्वाचन कार्यालय, शिक्षा विभाग कार्यालय या अपने मूल विद्यालयों में ही काम कर रहे हैं। अधिकांश शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारी अब सेवानिवृत्ति के कगार पर हैं। यद्यपि अतिरिक्त भी हैं, लेकिन उनका वेतन और अन्य सभी प्रक्रियाएं मूल स्कूल द्वारा पूरी की जाती हैं। इन अतिरिक्त शिक्षकों एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों के पेंशन ,पीएफ प्रस्ताव, सेवा ग्रेच्युटी एवं भविष्य निधि प्रस्ताव सेवानिवृत्ति से 6 माह पूर्व शिक्षा निरीक्षक कार्यालय को भेजे जाते हैं। ताकि सभी प्रक्रियाएं पूरी कर सेवानिवृत्त होने के बाद समय पर पेंशन और अन्य लाभ तुरंत मिल सकें।
यदि सेवानिवृत्ति में 6 महीने या उससे कम समय बचा है तो अतिरिक्त शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को अन्य विद्यालयों में स्थानांतरित कर दिया गया तो सेवानिवृत्ति के बाद लाभ और पेंशन प्राप्त करने में काफी दिक्कतों को सामना करना पड़ सकता है।
6 महीने या उससे कम समय में सेवानिवृत्त होने वाले अतिरिक्त शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को समायोजन प्रक्रिया से बाहर रखा जाना चाहिए। महाराष्ट्र पूरोगामी शिक्षक संगठना के प्रदेश अध्यक्ष तानाजी कांबले ने मांग की है कि सरकार उन्हें उसी स्थान पर नौकरी पर रखे जहां वे कार्यरत हैं तथा उनकी सेवानिवृत्ति की सुविधा प्रदान करे। इसके लिए शिक्षा आयुक्त शिक्षा निदेशक, प्राथमिक तथा माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विभाग, माध्यमिक शिक्षा उपनिदेशक मुंबई विभाग माध्यमिक शिक्षा निरीक्षक, बृहन्मुंबई उत्तर, दक्षिण और पश्चिम विभाग को इस आशय का पत्र भेजा है।


