UGC कानून × भाजपा का अन्तर कलह !

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■ भाजपा को सिर्फ भाजपा ही हरा सकती है.

श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

भारतीय जनता पार्टी अब देश की वो राजनीतिक पार्टी बन गई है जिसे कॉंग्रेस या किसी अन्य राजनीतिक दल द्वारा हरा पाना मुश्किल है। लेकिन जैसे जिसका जन्म हुआ है उसकी मृत्यु निश्चित हैं। जिसकी उत्थान होगा उसका पतन भी निश्चित हैं। अब भाजपा एक ऐसी राजनीतिक पार्टी बन गई है जिसे अगर कोई हरा सकता है तो सिर्फ भाजपा। उत्तर प्रदेश चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और इसी बीच UGC कानून, केंद्र सरकार द्वारा थोपना, क्या भाजपा के अन्तर कलह को उजागर करता है ?

भाजपा के शीर्ष नेताओं की आपसी लड़ाई किसी से छिपी नहीं है। एक समय था जब कॉंग्रेस को हराना भी नामुमकिन सा प्रतीत होता था। ऐसे हालात में कॉंग्रेस को खुद कॉंग्रेस और उसके घटक दलों ने ही निपटाया। याद करिए वर्ष 2009 से 2014 के बीच का कालखंड। कॉंग्रेसी नेताओं के भ्रष्टाचार एक के बाद एक लोगों के सामने आ रहे थे। भ्रष्टाचार दिखा मीडिया जरूर रहा था लेकिन उजागर करने वाले कॉंग्रेस और उनके सहयोगी दल के नेता ही थे। इतना भ्रष्टाचार-भ्रष्टाचार दिखा दिया गया कि जनता को भाजपा के अलावा कोई विकल्प सूझा ही नहीं।

वर्ष 2014 से देश की सत्ता में भाजपा सत्तासीन है । क्या भ्रष्टाचार खत्म हो गए ? अब तो सारे भ्रष्टाचारियों का मुख्य ठिकाना ही भाजपा हैं। हजारों करोड़ के बैंक फ्रॉड हो, सहयोगी दलों के 30 हज़ार करोड़ का फ्रॉड हो, सभी को ईमानदारी के साबुन से धोया जा रहा है।

वर्ष 2013 का NSEL फ्रॉड याद होगा । 5600 करोड़ का फ्रॉड। फ्रॉड सामने आने के बाद सभी आरोपी जेल गए। और अब सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार स्वयं एक भाजपा के मुख्यमंत्री ने लिखित रूप से मामले में दखलअंदाजी की है और पूरा मामला निपटाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन कहीं कुछ प्रकाशित हो रहा है, नहीं। क्योंकि भाजपा और उनके सहयोगी दलों ने एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने का अंजाम कॉंग्रेसी सरकार के दौरान देखा है।

अब जबकि सत्ता रूढ भाजपा और सहयोगी दल इतने सटीक तरीके से एक दूसरे के भ्रष्टाचार को छुपा रहे हैं तो आखिर भाजपा का पतन कैसे होगा ?

■ प्रकृति करेगी भाजपा का बेड़ा गर्क

जब एक ही परिवार या पार्टी खूब आगे बढ़ने लगती हैं तो उसका पतन उसके अंदर से शुरू होता है। आप को याद होगा मध्यप्रदेश चुनाव के दौरान शिवराज सिंह के हारने वाला दौर। उस चुनाव से ठीक पहले SC-ST कानून को केंद्र सरकार ने मध्यप्रदेश में लागू किया था। नतीजतन शिवराज सिंह की सरकार चुनाव हार गई। हरवाया कौन? कॉंग्रेस, नहीं।

खुद भाजपा के केंद्र में विराजमान मोदी- शाह को शिवराज सिंह के बढ़ते प्रभुत्व से डर लगने लगा था। SC-ST कानून लागू करने की चाल केंद्र की थी। केंद्र में कौन था-भाजपा। फिर जैसे ही शिवराज सिंह चुनाव हारे, चुनाव के तुरंत बाद SC-ST कानून को मध्यप्रदेश में ढीला कर दिया गया।

अब चारों ओर अगले प्रधानमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ की धूम मची हुई है। 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव जीतने के बाद योगी जी प्रधानमंत्री के प्रबल दावेदार होंगे। कुर्सी मोदी-शाह की खतरे में है।

अगर उत्तर प्रदेश में जनरल श्रेणी के लोग भाजपा से विफर जाएं तो योगी जी की हार तय है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए UGC कानून केंद्र लागू कर रहा है। मकसद किसी भी जाति को लाभ पहुंचाना नहीं, सिर्फ और सिर्फ योगी जी को तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने से रोकना है। जिससे कि मोदी-शाह के आगे का रास्ता साफ़ हो सके। जो लोग इस UGC से खुश हो रहे हैं, उनकी खुशी ज्यादा दिन टिकती नहीं। 2017 उत्तर प्रदेश चुनाव बितते ही UGC कानून ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता।

हालाकि योगी जी इस चाल को समझ चुके हैं। उनको मुख्यमंत्री बनाने के पीछे जो शक्ति है, उसीके इशारे पर UGC के खिलाफ आंदोलन इस कदर विकराल रूप लेगा कि मोदी-शाह के राजनीतिक गुब्बारे की हवा निकल जाएगी।इस अंतर विरोध से आप भी समझ ही चुके होंगे कि भाजपा को एक दिन कोई हरायेगा जरूर और जो भी भाजपा की हार का कारण होगा वो भाजपा स्वयं होगी।

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