मुंबई वार्ता संवाददाता

बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि उसने नेशनल स्पोर्ट्स क्लब ऑफ इंडिया के साथ मुआवजा विवाद के तहत 12.66 करोड़ रुपये की टोकन राशि 5% वार्षिक ब्याज के साथ जमा कर दी है। यह विवाद कोविड-19 महामारी के दौरान NSCI परिसर को जंबो क्वारंटाइन सेंटर के रूप में इस्तेमाल करने को लेकर है।


न्यायमूर्ति एम. एस. कर्णिक और एस. एम. मोडक की खंडपीठ ने बीएमसी की दलीलें दर्ज करते हुए NSCI को दो हफ्तों के भीतर राशि निकालने के लिए हलफनामा दाखिल करने की अनुमति दी। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि NSCI की अतिरिक्त 18,205.42 वर्ग मीटर खुली जमीन के मुआवजे से जुड़े मुद्दे पर छह सप्ताह बाद सुनवाई होगी।


NSCI ने अपने वकील विवेक कांटावाला के जरिए अदालत में याचिका दाखिल कर अप्रैल 2020 से सितंबर 2022 तक करीब 30 महीनों तक अपने परिसर के उपयोग के लिए बीएमसी से लगभग 40 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की है। यह मांग बीएमसी के अप्रैल 2020 के उस सर्कुलर के आधार पर की गई, जिसमें आपात स्थिति में निजी परिसरों के उपयोग पर मुआवजा देने का प्रावधान था।


बीएमसी ने नवंबर 2025 में कहा था कि वह देय राशि की गणना कर दिसंबर तक रिपोर्ट तैयार करेगी। निगम के अनुसार, उसने लगभग 23,116.63 वर्ग मीटर क्षेत्र (जिसमें SVP स्टेडियम स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और डोम एरिना शामिल हैं) का उपयोग किया, लेकिन अतिरिक्त 18,205.42 वर्ग मीटर खुली जमीन के इस्तेमाल से इनकार कर दिया।
28 जनवरी को बीएमसी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अतुल डामले ने अदालत को बताया कि क्वारंटाइन सेंटर के बाहर के खुले क्षेत्र का उपयोग नहीं किया गया, इसलिए उसे मुआवजा गणना में शामिल नहीं किया गया।इससे पहले अदालत ने 12.66 करोड़ रुपये की गणना को “त्रुटिपूर्ण” बताते हुए बीएमसी आयुक्त से इसकी गणना का फॉर्मूला स्पष्ट करने को कहा था।
बीएमसी ने जवाब दिया कि यह राशि 23,000 वर्ग मीटर से अधिक निर्मित क्षेत्र पर 1% स्टांप ड्यूटी रेडी रेकनर दर के आधार पर तय की गई है।इसके बाद 11 फरवरी को अदालत ने बीएमसी को निर्देश दिया था कि वह 5% ब्याज के साथ यह राशि 16 मार्च तक जमा करे, जिसके अनुपालन में अब यह रकम जमा कर दी गई है।


