मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मंत्री एडवोकेट आशीष शेलार ने चुनाव आयोग, ईवीएम और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ विपक्षी दलों द्वारा निकाले गए मोर्चे पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि चुनाव में जीत मिलने पर ईवीएम और चुनाव आयोग सही लगते हैं, लेकिन हारने के बाद उसी चुनाव आयोग और ईवीएम पर आरोप लगाए जाते हैं। उन्होंने विपक्ष के आज के मोर्चे को ‘गर्जना मोर्चा’ के बजाय ‘कोल्हे को अंगूर खट्टे’ वाली कहावत के अनुरूप ‘कोल्हेकुई मोर्चा’ करार दिया।


विपक्षी दलों के मोर्चे के जवाब में आयोजित पत्रकार वार्ता में शेलार ने कहा कि आज विश्व पशु दिवस है और आज का मोर्चा देखने के बाद ऐसा लगता है कि इसका नाम ‘गर्जना मोर्चा’ नहीं, बल्कि ‘कोल्हेकुई का मोर्चा’ होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष की मानसिकता ऐसी हो गई है कि ‘अपना जीते तो सब सही और दूसरा जीते तो चुनाव प्रक्रिया गलत’।


■ छह चुनावों का दिया हवाला
ज्ञानेश कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त बनने के बाद हुए छह चुनावों का उल्लेख करते हुए शेलार ने कहा कि इनमें तीन स्थानों पर भाजपा या एनडीए को सफलता मिली, जबकि केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में गैर-भाजपा दलों की सरकारें बनीं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल, बिहार और असम में भाजपा को सफलता मिली। ऐसे में चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाने का कोई आधार नहीं है।
शेलार ने कहा कि चुनाव में हार का ठीकरा चुनाव आयोग पर फोड़ने के बजाय जनता के जनादेश को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने महाराष्ट्र में विधानसभा का दोबारा चुनाव कराने की मांग पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति से पहले ही महाराष्ट्र विधानसभा का चुनाव हो चुका था। इसलिए उनके अनुसार विपक्ष के मौजूदा आरोपों में ही विरोधाभास है।
■ उद्धव और राज ठाकरे से ईवीएम पर सवाल
ईवीएम पर सवाल उठाने वाले उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे पर भी शेलार ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2007 और 2012 के मुंबई महानगरपालिका चुनाव ईवीएम के माध्यम से हुए थे और उस समय उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना को सफलता मिली थी। 2017 में भी ईवीएम के माध्यम से मुंबई महानगरपालिका में सत्ता हासिल हुई।
शेलार ने कहा कि यदि उस समय ईवीएम सही थी, तो अब दूसरे दलों की जीत के बाद उसे गलत बताने का क्या आधार है। उन्होंने कहा कि 2009 में राज ठाकरे की पार्टी के सबसे अधिक विधायक भी ईवीएम के माध्यम से ही चुने गए थे। इसलिए ईवीएम पर आरोप लगाने से पहले अपने राजनीतिक इतिहास को भी देखना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि ईवीएम लाने का निर्णय कांग्रेस के शासनकाल में हुआ था। कांग्रेस के शासनकाल में हुए चुनावों में कांग्रेस के जीतने पर ईवीएम सही थी, लेकिन भाजपा के जीतने पर ईवीएम पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं।
■ ‘एसआईआर से मतदाता सूची अधिक सुरक्षित होगी’
शेलार ने दावा किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के माध्यम से मतदाता सूची अधिक शुद्ध और सुरक्षित होगी। उनके अनुसार, करीब 90 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो चुकी है और बाकी मतदाताओं का भी सत्यापन किया जा रहा है। उन्होंने विपक्ष से एसआईआर को लेकर जनता में भ्रम पैदा नहीं करने की अपील की।
राज ठाकरे द्वारा एसआईआर रद्द करने की मांग पर शेलार ने उनके पुराने बयानों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि 15 अक्टूबर 2025 को राज ठाकरे ने मतदाता सूची में उम्र संबंधी विसंगतियों का मुद्दा उठाया था। 19 अक्टूबर 2025 को उन्होंने मतदाता सूची में 96 लाख फर्जी मतदाताओं का आरोप लगाते हुए सूची साफ करने और उसके बाद ही स्थानीय निकाय चुनाव कराने की बात कही थी।
शेलार ने कहा कि 1 नवंबर 2025 को उद्धव ठाकरे गुट और शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा निकाला था और दोहरे मतदाताओं तथा दस्तावेजों के सत्यापन की मांग की थी। 4 नवंबर 2025 को भी आयोग से दोहरे मतदाताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। उन्होंने दावा किया कि 15 जनवरी 2026 को राज ठाकरे ने भी 10 लाख दोहरे मतदाताओं का आरोप लगाकर कार्रवाई की मांग की थी। शेलार ने सवाल किया कि अब आयोग मतदाता सूची की सफाई और सत्यापन कर रहा है तो इसका विरोध क्यों किया जा रहा है।
शेलार ने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र का मूलभूत अधिकार है और भारत के नागरिक अपने मताधिकार के प्रति सजग हैं। उन्होंने कहा कि जनता के जनादेश को स्वीकार करने के बजाय चुनाव हारने के बाद शिकायत करने वाला विपक्ष का यह मोर्चा उनके अनुसार ‘रोने वालों का मोर्चा’ है।
शेलार ने अंत में कहा कि चुनाव आयोग, ईवीएम और एसआईआर के खिलाफ मोर्चे में उठाई गई मांगों, भाषणों और दलीलों में तथ्य का अभाव है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि इस मोर्चे का वर्णन ‘कोल्हे को अंगूर खट्टे’ वाली कहावत से अलग नहीं किया जा सकता।


