मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई में शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने बड़ा कदम उठाया है। BMC ने 164 ऐसे स्कूलों की सूची जारी की है, जो बिना आधिकारिक मान्यता के संचालित हो रहे थे। इन सभी स्कूलों को अगले शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले बंद करने का निर्देश दिया गया है।


BMC द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि इन स्कूलों में पढ़ रहे सभी छात्रों को आसपास के मान्यता प्राप्त स्कूलों में समायोजित किया जाएगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि विद्यार्थियों का दाखिला नजदीकी मुंबई पब्लिक स्कूलों में कराया जाए, ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, बिना मान्यता वाले स्कूल निर्धारित मानकों का पालन नहीं करते हैं।
ऐसे स्कूलों में न तो बुनियादी सुविधाएं सही होती हैं और न ही शिक्षा की गुणवत्ता तय मानकों के अनुरूप होती है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि किसी दुर्घटना की स्थिति में प्रशासन के पास इन स्कूलों का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं होता, जिससे कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता है।


जांच में यह भी सामने आया कि कई स्कूल अंग्रेजी, मराठी, हिंदी और उर्दू माध्यम में चल रहे थे, लेकिन कुछ कक्षाओं—जैसे कक्षा 1 से 4 या 5 से 7—के लिए उनके पास मान्यता नहीं थी। ऐसे सभी सेक्शन को भी बंद करने के आदेश दिए गए हैं।
BMC के आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों की संख्या में कमी आई है। 2023-24 में ऐसे 210 स्कूल थे, जो 2024-25 में घटकर 186 हो गए और अब 2025-26 में इनकी संख्या 164 रह गई है। इनमें से 95 स्कूल 2013 से पहले शुरू हुए थे, जबकि 69 स्कूल 2013 के बाद शुरू हुए।
हालांकि, इस फैसले पर कुछ लोगों ने चिंता भी जताई है। सामाजिक कार्यकर्ता गॉडफ्रे पिमेंटा ने कहा कि कई इलाकों में नगर निगम के स्कूल नहीं हैं और निजी स्कूल गरीब परिवारों के लिए महंगे हैं। ऐसे में इन स्कूलों को पूरी तरह बंद करने के बजाय उन्हें मान्यता प्राप्त करने के लिए समय दिया जाना चाहिए।
BMC की यह कार्रवाई जहां एक ओर शिक्षा के मानकों को लागू करने की दिशा में अहम कदम है, वहीं दूसरी ओर यह शहर में सस्ती और सुलभ शिक्षा की उपलब्धता को लेकर चुनौती भी खड़ी करती है।


