मौत का तालाब निगल गया एक और मासूम की जिंदगी।

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पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी, विधायक संजय उपाध्याय ने लापरवाह बीएमसी आधिकारियों पर एक्शन की मांग की।

मुंबई वार्ता संवाददाता

बोरीवली (पश्चिम) में झांसी की रानी उद्यान में स्थित तालाब में डूबने से रविवार को एक और बच्चे की दुःखद मौत हो गई।इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।

बता दें कि इस तालाब को लेकर महानगरपालिका की लापरवाही के खिलाफ जनसेवक गोपाल शेट्टी पिछले कई वर्षों से संघर्ष करते आ रहे हैं। इस तालाब की उचित देखभाल, सुरक्षा दीवार बनवाने और सुरक्षा कर्मियों की नियुक्ति को लेकर जनसेवक शेट्टी ने महानगरपालिका के संबंधित विभाग से अनगिनत बार पत्राचार किया था। वरिष्ठ अधिकारियों संग बैठकों के सिलसिलों के साथ-साथ उन्होंने कई बार आंदोलन तक छेड़ा। पर महानगरपालिका अधिकारियों के कानों पर जूं नहीं रेंगी और इस तालाब में डूबने से हो रही मौतों की गिनती बढ़ती चली गई।

रविवार, 3 अगस्त को भी इस तालाब में एक और बच्चे की मौत की दर्दनाक खबर को सुनते ही पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी तत्काल घटनास्थल पर जा पहुंचे। जनसेवक गोपाल शेट्टी ने दिवंगत बच्चे के परिवार के साथ संवेदना व्यक्त की और फिर सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ एमएचबी पुलिस स्टेशन पहुंचकर गैरजिम्मेदार महानगरपालिका अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।इस तरह की जानलेवा घटनाओं को रोकने के लिए अहितियात बरतने और जिम्मेदार व्यक्तियों को सजा दिलाने की मांग को लेकर गोपाल शेट्टी के नेतृत्व में हुए इस एक्शन से प्रशासन की चूलें तक हिल गईं।

इस अवसर पर जनसेवक गोपाल शेट्टी के साथ बोरीवली के भाजपा विधायक संजय उपाध्याय सहित कई पूर्व नगरसेवक, भाजपा के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे। जनसेवक गोपाल शेट्टी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि माननीय अदालत ने इस तालाब की सम्पूर्ण देखरेख महानगरपालिका द्वारा करने संबंधी स्पष्ट आदेश वर्षों पहले जारी किया था। कलेक्टर ने तालाब स्थल की पूरी भूमि महानगरपालिका के सुपुर्द भी कर दी थी।

जिसके उपरांत तत्कालीन बीएमसी कमिश्नर इकबाल सिंह चहल ने महानगरपालिका ‘आर’ वार्ड को इस तालाब की देखरेख के लिए दिशानिर्देश भी जारी किया था। परंतु वार्ड आफिसर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की लापरवाही के कारण तालाब आज भी लावारिश पड़ा है और यहां पर डूबने से मौतों के सिलसिलों के आंकड़े बढ़ते चले जा रहे हैं। वार्ड ऑफिसर और अन्य अधिकारियों को इसकी जिम्मेदारी उठानी होगी वरना कोई बड़ा आंदोलन करने के लिए जनता मजबूर हो जाएगी।

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