मुंबई वार्ता संवाददाता

सुप्रीम कोर्ट द्वारा आवारा श्वानो को सड़कों से हटाकर आश्रयगृहों में रखने के निर्देश दिए जाने के दो महीने बाद भी मुंबई में एक भी श्वान आश्रयगृह स्थापित नहीं हो पाया है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) अब जाकर 200 से 500 कुत्तों की क्षमता वाला एक आश्रयगृह बनाने के लिए जमीन की तलाश कर रही है।


बीएमसी के पशु स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख और देवनार बूचड़खाने के महाप्रबंधक डॉ. कलीमपाशा पठान ने बताया कि आश्रयगृह के लिए उपयुक्त भूखंड की पहचान की जा रही है और उसके आरक्षण (लैंड यूज़) में बदलाव की प्रक्रिया चल रही है।
उन्होंने कहा, “जैसे ही जमीन का आरक्षण बदला जाएगा और प्लॉट आधिकारिक रूप से आवंटित होगा, टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी और आगे की कार्यवाही की जाएगी।”2024 की पशु गणना के अनुसार, मुंबई में इस समय 90,757 आवारा कुत्ते हैं, जो 2014 में दर्ज 95,172 की संख्या से कुछ कम है। हालांकि, कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है। पिछले वर्ष शहर में कुत्तों के काटने के 1,35,253 मामले दर्ज किए गए, जिसके बाद महाराष्ट्र विधानसभा में भी इस मुद्दे पर तीखी बहस हुई और विधायकों ने आवारा कुत्तों को पकड़कर रखने की मांग की।
डॉ. पठान के अनुसार, बीएमसी के पास पहले से कोई शेल्टर इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है क्योंकि अब तक की नीति आवारा कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी करने और फिर उन्हें उसी इलाके में छोड़ने की रही है। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट के 11 नवंबर 2025 के आदेश को लागू करने के लिए बीएमसी को शून्य से शुरुआत करनी पड़ रही है। इसके बाद पशु कल्याण बोर्ड ऑफ इंडिया ने भी सभी शहरों को आश्रयगृह बनाने के निर्देश जारी किए हैं।सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नागरिकों की शिकायतों में भी तेज़ बढ़ोतरी हुई है।
डॉ. पठान ने बताया, “आदेश के व्यापक प्रचार के बाद हमें मिलने वाली शिकायतों में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। लोग लगातार मांग कर रहे हैं कि उनके इलाकों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए।” लेकिन शेल्टर की अनुपस्थिति में फिलहाल बीएमसी केवल कुत्तों की नसबंदी कर उन्हें वापस उसी इलाके में छोड़ने के लिए मजबूर है।डॉग शेल्टर के लिए तय मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार, 500 कुत्तों की क्षमता वाले आश्रयगृह के लिए 157 फीट × 90 फीट का क्षेत्र आवश्यक है, जिसमें केनेल, रसोई और स्टाफ रूम शामिल हों। वहीं 100 कुत्तों के शेल्टर के लिए 70 फीट × 40 फीट की जगह अनिवार्य है।
एसओपी में कुत्तों को शेल्टर के भीतर ही भोजन देने और संक्रमण रोकने के लिए दिन में दो बार सफाई करने का प्रावधान भी है।हालांकि, पशु कल्याण संगठनों ने शेल्टर मॉडल की व्यवहारिकता पर सवाल उठाए हैं। प्लांट एंड एनिमल्स वेलफेयर सोसाइटी, मुंबई के संस्थापक सुनीश कुंजू ने कहा, “कुत्ते अत्यंत क्षेत्रीय होते हैं। अगर 10 कुत्तों को भी एक साथ रखा जाए तो आपसी लड़ाई की आशंका रहती है। साथ ही, भीड़भाड़ वाले शेल्टर में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संक्रमण या डिस्टेंपर जैसी बीमारियां तेजी से फैल सकती हैं।”
उन्होंने आशंका जताई कि बीएमसी इन स्वास्थ्य जोखिमों से कैसे निपटेगी।कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों और बढ़ते जनआक्रोश के बावजूद मुंबई में आवारा कुत्तों के लिए आश्रयगृह अब भी कागज़ों तक सीमित हैं, और ज़मीनी स्तर पर समाधान का इंतज़ार जारी है।


