घर और ब्याज की रकम न देने वाले डेवलपर्स को अब जेल होगी, ‘महारेरा’ का अहम फैसला।

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मुंबई वार्ता/सतीश सोनी

‘महारेरा’ के रिकवरी ऑर्डर का पालन न करने वाले डेवलपर्स की अब प्रॉपर्टी ज़ब्त करने, बैंक अकाउंट फ्रीज करने और सीधे जेल भेजने की कार्रवाई होगी। इस फैसले से घर खरीदने वालों को राहत मिलेगी, और ‘महारेरा’ ने इस बारे में 18 नवंबर को एक सर्कुलर जारी किया था। ऐसा सख्त फैसला लेने वाला महाराष्ट्र देश का पहला राज्य बन गया है।

रिकवरी ऑर्डर के बाद भी डेवलपर्स शिकायत करने वाले को ब्याज और घर की रकम वापस नहीं करते हैं। ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी या ‘रेरा’ कानून के उल्लंघन को लेकर ‘महारेरा’ में कई शिकायतें दर्ज होती हैं। अगर इन शिकायतों की सुनवाई में यह साबित हो जाता है कि ‘रेरा’ कानून का उल्लंघन हुआ है, तो डेवलपर्स के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।

इसके अनुसार, शिकायत करने वाले द्वारा डेवलपर को प्रॉपर्टी (घर) के लिए दी गई रकम ब्याज के साथ वापस करने का आदेश जारी किया जाता है। हालांकि, ज़्यादातर डेवलपर्स इस आदेश का पालन नहीं करते हैं। ऐसे डेवलपर्स के खिलाफ ‘महारेरा’ द्वारा रिकवरी ऑर्डर, यानी ‘रिकवरी वारंट’ जारी किए जाते हैं। इस रिकवरी ऑर्डर को संबंधित डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर लागू करते हैं।

इसके अनुसार, डेवलपर की प्रॉपर्टी जब्त की जाती हैं, नीलाम की जाती हैं और संबंधित शिकायतकर्ता को एक तय रकम दी जाती है। हालांकि, ‘महारेरा’ के नए सर्कुलर के अनुसार, प्रॉपर्टी जब्त करने और नीलाम करने के साथ-साथ जेल की सज़ा का भी प्रावधान होगा।अगर रिकवरी ऑर्डर जारी होने के ६० दिनों के अंदर घर की रकम ब्याज के साथ वापस नहीं की जाती है, तो शिकायतकर्ता को डेवलपर द्वारा रकम वापस न करने के बारे में ‘महारेरा’ वेबसाइट पर शिकायत या एप्लीकेशन देनी होगी। एप्लीकेशन के चार हफ़्ते के अंदर ‘महारेरा’ द्वारा मामले की सुनवाई की जाएगी।

सुनवाई के दौरान डेवलपर को रकम वापस करने का मौका दिया जाएगा।अगर आखिरी मौके के बाद भी रकम वापस नहीं की जाती है, तो डेवलपर्स को एफिडेविट के ज़रिए अपनी संपत्ति, बैंक अकाउंट और इन्वेस्टमेंट की जानकारी देनी होगी। एफिडेविट जमा न करने पर संबंधित डेवलपर के खिलाफ समन जारी किया जाएगा। उसके बाद उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। माना जा रहा है कि इससे कस्टमर्स के साथ होने वाली धोखाधड़ी पर भी रोक लगेगी।

नए सर्कुलर के मुताबिक, रिकवरी ऑर्डर न मानने वाले डेवलपर के खिलाफ अब तीनों तरह की कार्रवाई की जा सकती है, यानी सीज़, बैंक अकाउंट फ्रीज करना और जेल। डेवलपर को सीधे तीन महीने के लिए जेल भेजा जा सकता है। चूंकि ‘महारेरा’ के पास गिरफ्तार करने का अधिकार नहीं है, इसलिए यह प्रोसेस सिविल कोर्ट करेगा।

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