■ मुंबई महानगरपालिका की पूरी रणनीति पेश
मुंबई वार्ता/सतीश सोनी

मुंबई महानगरपालिका के लिए माहौल गरमा रहा है। यह चुनाव उद्धव ठाकरे के लिए अस्तित्व की लड़ाई होगी। उन्हें महाशक्ति भाजपा और शिंदे की सेना से कड़ी चुनौती मिलेगी। यह चुनाव राज ठाकरे की मनसे के लिए दूरगामी परिणाम और कॉंग्रेस के लिए बढ़ावा देने वाला हो सकता है। शरद पवार भी बारामती के मालेगांव से इन हलचलों पर नजर रख रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि बीएमसी चुनाव की अहमियत का एहसास सभी को हो रहा है ।


उद्धव ठाकरे की शिवसेना, राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना, देवेंद्र फडणवीस की भाजपा, एकनाथ शिंदे की शिवसेना जैसी मजबूत स्टार कास्ट मुंबई महानगरपालिका की लड़ाई के लिए तैयार है। ये सभी किसी भी तरह सत्ता या सत्ता में हिस्सेदारी हासिल करने की कोशिश करेंगे। गठबंधन और मोर्चों के अलग-अलग फॉर्मूले आजमाए जा रहे हैं।सबकी नजर मुंबई पर टिकी है। इसीलिए ठाकरे की शिवसेना ने देश के गृह मंत्री अमित शाह के मुंबई दौरे की आलोचना की।
अमित शाह का सिरदर्द यह है कि उद्धव ठाकरे और शिवसेना में इतनी उथल-पुथल के बाद भी सब खत्म नहीं होने वाला है। इसीलिए ठाकरे के नेताओं द्वारा लगातार आलोचना करने के बावजूद उनका मुंबई का दौरा रुक नहीं रहा हैं।जहां मुंबई में दो शिवसेना के बीच मुकाबला है, वहीं शरद पवार दूर मालेगांव शुगर फैक्ट्री चुनाव में व्यस्त हैं। फिर भी वे बीएमसी चुनाव के बारे में बात करने का मोह नहीं छोड़ पाए।
उन्होंने कहा कि वे तीनों पार्टियों को एमआईए में बिठाकर चुनाव के बारे में फैसला करेंगे। मुंबई में उद्धव ठाकरे का दबदबा है। इसलिए हम बैठकर तय करेंगे कि मुंबई में साथ लड़ना है या नहीं। उन्होंने कहा कि मुंबई में हम सभी में से उद्धव ठाकरे के पास ज्यादा ताकत है।
■ भाजपा की उम्मीदें बढ़ीं
२०१७ में भाजपा ने मुंबई में अप्रत्याशित सफलता हासिल करते हुए ८२ सीटें जीतीं। उस समय शिवसेना फडणवीस सरकार का हिस्सा थी, इसलिए भाजपा ने बीएमसी पर दावा नहीं किया। मुंबई महानगरपालिका उद्धव ठाकरे के लिए छोड़ी गई। इस बार भाजपा की उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं।
■ राज ठाकरे की वैल्यू बढ़ी
मौजूदा सभी राजनीतिक घटनाक्रमों में राज ठाकरे की वैल्यू बढ़ी है। उद्धव ठाकरे, एकनाथ शिंदे, भाजपा-महायुति जैसे सभी विकल्प राज ठाकरे के लिए खुले हैं। भले ही मनसे मुंबई में किंग न बन पाए, लेकिन वह किंग मेकर की भूमिका में नजर आ सकती है।जब तक राज ठाकरे के साथ क्या करना है, इस सवाल का जवाब नहीं मिल जाता, तब तक भाजपा और महायुति नेताओं के लिए चैन से बैठना मुश्किल है।
चर्चा यह भी है कि मुंबई महानगरपालिका चुनाव आदित्य ठाकरे बनाम श्रीकांत शिंदे के तौर पर खेला जाएगा। किसकी मुंबई? कौन मुंबई का किंग? इस सवाल का जवाब हमें अगले चार-पांच महीनों में मिल जाएगा। तब तक मुंबई के बनते बिगड़ते राजनीतिक गणित को देख कर कयासों का बाजार गर्म रहेगा।


