● केंद्र के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया
मुंबई वार्ता/सतीश सोनी

कांग्रेस नेता नाना पटोले ने शुक्रवार को चुनाव आयोग की आलोचना करते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया के सीसीटीवी फुटेज, वेबकास्टिंग और वीडियो फुटेज को ४५ दिन बाद नष्ट कर देने में केंद्र के साथ चुनाव आयोग की मिलीभगत है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक डेटा का इस्तेमाल ‘दुर्भावनापूर्ण बयानबाजी’ को बढ़ावा देने के लिए किया जा सकता है।


चुनाव आयोग ने 30 मई को राज्य चुनाव अधिकारियों को एक पत्र में निर्देश दिया था कि अगर चुनाव परिणामों को 45 दिनों के भीतर अदालत में चुनौती नहीं दी जाती है तो वे 45 दिनों के बाद ऐसे फुटेज नष्ट कर दें।
महाराष्ट्र विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष पटोले ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हरियाणा में चुनाव के बाद कुछ लोगों ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था और अदालत ने चुनाव आयोग को चुनाव प्रक्रिया के सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद चुनाव आयोग ने केंद्रीय कानून मंत्रालय को पत्र लिखकर चुनाव आचार संहिता नियमों की धारा ९३ में संशोधन करने को कहा।कांग्रेस नेता ने कहा कि केंद्र सरकार ने “दिन-रात काम किया” और नियमों में संशोधन किया।
पटोले ने दावा किया, “इससे पता चलता है कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग मिलीभगत से काम कर रहे हैं।” चुनाव आयोग को जानकारी छिपाने की क्या ज़रूरत थी और सरकार जनता को यह क्यों नहीं बताना चाहती कि कितने मतदाता मतदान केंद्र पर गए?
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है और चुनाव आयोग के आदेश को चुनौती दी है।
महाराष्ट्र के स्कूलों में पहली कक्षा से हिंदी शुरू करने के मुद्दे पर पटोले ने कहा कि मुख्य मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए ऐसे मुद्दे उठाए जा रहे हैं। लोगों का ध्यान भटकाने के लिए (मुख्यमंत्री) देवेंद्र फडणवीस और राज ठाकरे के बीच मैच फिक्सिंग की जा रही है। क्या किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दे खत्म हो गए हैं?”
ज्ञात हो कि हाल ही में देवेन्द्र फड़णवीस से मुलाकात के बाद ही मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने राज्य में छात्रों पर हिंदी थोपने की आलोचना करते हुए सरकार पर निशाना साधा था।


