मुंबई वार्ता संवाददाता

उपमुख्यमंत्री और आबकारी मंत्री अजित पवार की अध्यक्षता वाली कैबिनेट समिति द्वारा राजस्व बढ़ाने के लिए ४१ शराब उद्योगों को ३२८ शराब लाइसेंस (शराब की दुकानें) देने के निर्णय की आलोचना के बीच, तत्काल कोई नया लाइसेंस जारी नहीं करने का निर्णय लिया गया है।


राजनेताओं से जुड़ी शराब कंपनियों को शराब के लाइसेंस मिलने की खबर फैली थी। इससे महागठबंधन सरकार की तीखी आलोचना हुई। चूँकि उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे इस कारोबार में हैं, इसलिए उन पर हितों के टकराव का आरोप लगाया गया।


विपक्ष ने आरोप लगाया था कि महागठबंधन सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए शराब की बिक्री को बढ़ावा दे रही है। स्थानीय निकाय चुनाव जल्द ही होने वाले हैं। अगर शराब के लाइसेंस पर फैसला हो जाता, तो विपक्ष को सरकार के खिलाफ एक और मुद्दा मिलता। यही वजह है कि समिति ने फिलहाल लाइसेंस जारी नहीं करने का फैसला किया है।


