मुंबई वार्ता /विपिन शुक्ल

चक्कीनाका स्थित गुण गोपाल मंदिर प्रांगण में चल रही संगीतमय श्रीरामकथा के दौरान मंगलवार को श्रद्धा और भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रीधाम वृंदावन से पधारे कथावाचक स्वामी प्रेमनिधिदास जी महाराज ने राम वनवास, राजा दशरथ के मरण और राम–भरत मिलाप की मार्मिक कथा का सजीव वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।


कथावाचन के दौरान स्वामी प्रेमनिधिदास जी महाराज ने बताया कि माता कैकेयी के वरदान के चलते प्रभु श्रीराम का वनवास केवल एक घटना नहीं, बल्कि त्याग, मर्यादा और कर्तव्य का सर्वोच्च उदाहरण है। राम के वनगमन के वियोग में राजा दशरथ का प्राण त्यागना और इसके पश्चात भरत का भाई राम के प्रति अटूट प्रेम व राज्य त्याग की भावना ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।


भरत–राम मिलाप प्रसंग में पूरा पंडाल “जय श्रीराम” के जयघोष से गूंज उठा।यह संगीतमय रामकथा आदर्श रामलीला मंडल और जय अंबे जागरण मित्र मंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की जा रही है। स्वामी समर्थ रामदास जी महाराज (गुजरात वाले) के पावन सान्निध्य में शांतिपूर्ण और भक्ति भाव से हो रही संगीतमय रामकथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर प्रभु श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा ले रहे हैं।


कार्यक्रम को सफल बनाने में आयोजक मंडल के अध्यक्ष मुकेश मिश्रा, सचिव वैकुंठ ठाकुर, कोषाध्यक्ष संजय पांडेय, उपाध्यक्ष संतोष तिवारी एवं देवेंद्र पांडेय दिन-रात समन्वय बनाकर जुटे हुए हैं। वहीं श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ की व्यवस्था और प्रसाद को जन-जन तक पहुंचाने में अभिषेक ठाकुर, धर्मेंद्र तिवारी, शिवम मिश्रा, उपेंद्र तिवारी, अजय झा, जाटाशंकर पाठक, हर्षित तिवारी सहित अनेक कार्यकर्ता कड़ी मेहनत कर रहे हैं।


