लोकसभा में डॉ. श्रीकांत शिंदे का विपक्ष पर हमला, बोले— पेपर लीक पर राजनीति नहीं, शिक्षा व्यवस्था में सुधार जरूरी।

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श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ियों की रोकथाम से जुड़े संशोधन विधेयक पर लोकसभा में चर्चा के दौरान शिवसेना सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि केंद्र सरकार युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठोस कदम उठा रही है, जबकि विपक्ष छात्रों के मुद्दों पर केवल राजनीति कर रहा है।


डॉ. शिंदे ने कहा कि युवाओं का आक्रोश व्यवस्था परिवर्तन का संकेत है और सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी एवं मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि किसी एक परीक्षा का परिणाम किसी छात्र के पूरे जीवन का फैसला नहीं करता और युवाओं को निराश होने के बजाय आगे बढ़ने की प्रेरणा लेनी चाहिए।


उन्होंने युवाओं से छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान करते हुए कहा कि कम उम्र में ही उन्होंने हिंदवी स्वराज्य की नींव रखी थी। आज का युवा भी देश बदलने की क्षमता रखता है, जरूरत केवल सही दिशा और मजबूत व्यवस्था की है।


डॉ. शिंदे ने कहा कि नरेंद्र मोदी> के नेतृत्व वाली सरकार ने पेपर लीक की घटनाओं पर केवल बयानबाजी नहीं की, बल्कि पूरे सिस्टम में सुधार की दिशा में कदम उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार की नैतिक जिम्मेदारी का उदाहरण देते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया और अब संशोधन विधेयक के माध्यम से पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था की जा रही है। उनका कहना था कि सरकार का उद्देश्य केवल दोषियों को सजा दिलाना नहीं, बल्कि लाखों छात्रों का एक-एक साल बचाना है।


■ नीट परीक्षा साल में एक से अधिक बार कराने की वकालत


डॉ. शिंदे ने कहा कि देश की परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत है। उन्होंने सुझाव दिया कि नीट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा वर्ष में एक से अधिक बार आयोजित की जानी चाहिए ताकि बीमारी, पारिवारिक परिस्थितियों या अन्य कारणों से परीक्षा नहीं दे पाने वाले छात्रों का एक वर्ष बर्बाद न हो। उन्होंने कहा कि कई देशों में ऐसी परीक्षाएं साल में दो बार आयोजित होती हैं और भारत में भी ऐसी व्यवस्था लागू करने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।


उन्होंने प्रश्न बैंक प्रणाली विकसित करने, छात्रों पर मानसिक दबाव कम करने तथा कोचिंग उद्योग के प्रभावी नियमन की भी आवश्यकता बताई। साथ ही कहा कि केवल नीट ही नहीं, बल्कि अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी समयानुकूल सुधार किए जाने चाहिए।


■ महाराष्ट्र सरकार की शिक्षा योजनाओं का किया उल्लेख


डॉ. शिंदे ने कहा कि महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर तथा ईसी-बीसी वर्ग की बेटियों के लिए मुफ्त शिक्षा जैसी ऐतिहासिक पहल की है। उन्होंने दावा किया कि सरकार केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए भी प्रतिबद्ध है।

■ विपक्ष पर साधा निशाना


विपक्ष पर हमला बोलते हुए डॉ. शिंदे ने कहा कि जो लोग आज युवाओं के हितैषी बनने का दावा कर रहे हैं, वे छात्र आंदोलन के दौरान 37 दिनों तक जंतर-मंतर नहीं पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि अब राजनीतिक लाभ के लिए युवाओं के नाम पर राजनीति की जा रही है।


उन्होंने कहा कि छात्रों की भावनाओं को भड़काना, सरकार के खिलाफ भ्रम फैलाना या केवल आरोप लगाना किसी समस्या का समाधान नहीं है। सरकार ने छात्रों से संवाद किया, उनकी मांगें सुनीं और कई मामलों में दर्ज मुकदमे भी वापस लिए, जो लोकतांत्रिक संवेदनशीलता का प्रमाण है।


डॉ. श्रीकांत शिंदे ने कहा कि परीक्षा सुधार संशोधन विधेयक केवल पेपर लीक रोकने का कानून नहीं, बल्कि करोड़ों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने, परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार लाने का मजबूत कदम है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप छोड़कर देश के युवाओं के भविष्य के साथ खड़ा हो।

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