मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई विश्वविद्यालय के टी.वाई.बी.कॉम. पेपर लीक मामले की सीआईडी जांच कराने के फैसले का अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), मुंबई महानगर ने स्वागत किया है। परिषद ने कहा कि यह निर्णय छात्रों के न्याय के लिए पिछले कई महीनों से चलाए जा रहे आंदोलन की महत्वपूर्ण सफलता है। साथ ही संगठन ने मांग की कि जांच महाराष्ट्र सार्वजनिक विश्वविद्यालय अधिनियम, 2016 के तहत पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और कानून के दायरे में कराई जाए।


एबीवीपी ने बताया कि टी.वाई.बी.कॉम. पेपर लीक प्रकरण के विरोध में 20 अप्रैल से लगातार आंदोलन किया जा रहा था। आंदोलन की प्रमुख मांगों में से एक सीआईडी जांच की थी, जिसे 27 जुलाई को मुंबई विश्वविद्यालय की प्रबंधन परिषद की बैठक में पारित प्रस्ताव के माध्यम से स्वीकार कर लिया गया।


हालांकि, परिषद ने इस बात पर चिंता भी जताई कि जांच की शर्तें और कार्यक्षेत्र (टर्म्स एंड कंडीशंस) तय करने का अधिकार कुलपति को दिया गया है। एबीवीपी का कहना है कि जांच की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पूरी प्रक्रिया किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप, पक्षपात या दबाव से मुक्त होनी चाहिए।
संगठन ने मांग की कि जांच महाराष्ट्र सार्वजनिक विश्वविद्यालय अधिनियम, 2016 तथा मुंबई विश्वविद्यालय के लागू नियमों के अनुसार ही कराई जाए।
साथ ही किसी भी दोषी को संरक्षण न दिया जाए, कोई तथ्य छिपाया न जाए और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
एबीवीपी ने यह भी मांग की है कि जांच पूरी होने तक मामले से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को अनिवार्य अवकाश पर भेजा जाए, ताकि जांच निष्पक्ष ढंग से संपन्न हो सके।
परिषद ने कहा कि पेपर लीक केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य और विश्वविद्यालय की विश्वसनीयता से जुड़ा अत्यंत गंभीर मामला है। इसलिए जांच समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेही के साथ पूरी की जानी चाहिए।
एबीवीपी ने स्पष्ट किया कि वह छात्रों के हितों की रक्षा के लिए आगे भी पूरे मामले की निगरानी करेगी और जांच प्रक्रिया पर लगातार नजर रखते हुए आवश्यक होने पर आंदोलन जारी रखेगी।
इस पत्रकार परिषद में एबीवीपी मुंबई महानगर मंत्री अभिषेक पवार, महानगर सह मंत्री समीर हरजानी, शशिकांत चौहान, अलका यादव तथा कोकण प्रांत मीडिया संयोजक पियुषा हिंगमिरे उपस्थित रहे।


