सत्ताधारियों द्वारा नगरपालिका चुनावों में ड्रग्स के पैसों की बाढ़, ‘उड़ता महाराष्ट्र’ बनाने की साजिश: हर्षवर्धन सपकाल।

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■ बांग्लादेशियों को राज्य में लाकर सरकार में बैठे लोगों के करीबी ड्रग्स के कारखाने चला रहे हैं।

■ ड्रग्स फैक्ट्री मामले में पकड़े गए 43 में से 40 बंगाली व बांग्लादेशी मजदूरों को किसके दबाव में छोड़ा गया?

मुंबई वार्ता संवाददाता

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में महाराष्ट्र को बर्बादी की ओर ले जाने के नए-नए उदाहरण लगातार सामने आ रहे हैं। सरकारी जमीनों की बिक्री में घोटाले, टेंडरों में कमीशन और समृद्धि–शक्तिपीठ महामार्ग जैसे भ्रष्टाचार से कमाया गया पैसा अब कम पड़ने लगा है। इसी कारण सत्ताधारी अपने करीबी लोगों के माध्यम से राज्य में नशीले पदार्थों के कारखाने शुरू कर युवा पीढ़ी को नशे की गिरफ्त में धकेल रहे हैं। नगरपालिका चुनावों में ड्रग्स के जरिए कमाए गए काले धन की बाढ़ लाकर महाराष्ट्र को ‘उड़ता महाराष्ट्र’ बनाने की घिनौनी साजिश चल रही है, ऐसी तीखी आलोचना महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने की।

तिलक भवन में आयोजित पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए सपकाल ने कहा कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के सातारा जिले के दरे गांव स्थित घर से कुछ ही दूरी पर नशीले पदार्थों का उत्पादन करने वाला कारखाना चल रहा था। इस मामले में दोनों उपमुख्यमंत्रियों के करीबी लोगों की संलिप्तता उजागर हुई है। इस प्रकरण में पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए कुछ आरोपियों को छोड़ दिया गया। कुछ बंगाली और बांग्लादेशी मजदूरों को गिरफ्तार कर मुख्य सरगनाओं को बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

ड्रग्स बनाने वालों को संरक्षण देने वाली महायुति सरकार को सातारा ड्रग्स फैक्ट्री मामले में निम्नलिखित सवालों के जवाब देने चाहिए—

1. पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के मजदूर इतनी दुर्गम जगह पर किसकी मदद से आकर बसे?

2. जिस इमारत में ड्रग्स का उत्पादन चल रहा था, उस इमारत के मालिक से ओंकार दिघे ने एकनाथ शिंदे की पार्टी के नगरसेवक प्रकाश शिंदे के काम के लिए जगह मांगी थी। यह स्पष्ट होने के बाद भी ओंकार दिघे को ड्रग्स निर्माण स्थल पर हिरासत में लेने के बावजूद किसके दबाव में छोड़ा गया?

3. ओंकार दिघे कब से सावली गांव में रह रहा है और उसे यहां कौन लाया?

4. अन्य लगभग 40 मजदूर जो वहां काम कर रहे थे, उनका क्या हुआ? उन्हें भागने में किसने मदद की? पुलिस ने किसके दबाव में उन्हें छोड़ दिया?

5. एक दिन पहले 2 किलो एमडी ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया गया विशाल मोरे, अजित पवार गुट की पुणे स्थित छात्र संगठन का प्रमुख है। उसका ओंकार दिघे और प्रकाश शिंदे से क्या संबंध है?

6. कार्रवाई से एक रात पहले तक प्रकाश शिंदे तेजस होटल में मौजूद थे। विशाल शिंदे की गिरफ्तारी के बाद वे वहां से कैसे निकल गए? उन्हें भागने में किसने मदद की?

7. पुलिस ने तेजस होटल की तलाशी क्यों नहीं ली? पंचनामा किया गया या नहीं? महाराष्ट्र को ड्रग्स के दलदल में धकेलने वाली इस गंभीर घटना पर गृहमंत्री अब तक चुप क्यों हैं? मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा वहां छापा डालने तक क्या सातारा पुलिस को इस पूरे मामले की जानकारी नहीं थी? क्या उनके आशीर्वाद से यह कारखाना चल रहा था? या फिर उपमुख्यमंत्रियों के करीबी लोग यह कारखाना चला रहे थे, इसलिए कार्रवाई नहीं की गई?

जहां साधारण सड़क तक नहीं है, ऐसे दुर्गम इलाके में होटल और ड्रग्स फैक्ट्री एक साथ कैसे शुरू हुए? फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों का खाना भी इसी होटल से जाता था। स्थानीय नागरिकों से जानकारी मिली है कि होटल का मालिक और ड्रग्स फैक्ट्री चलाने वाले एक ही व्यक्ति हैं। क्या उसके खिलाफ कार्रवाई न हो, इसके लिए उपमुख्यमंत्री और ठाणे जिले के एक सांसद ने पुलिस पर दबाव डाला?

विधानसभा में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने “ड्रग्स बनाना आसान है” जैसा गैर-जिम्मेदाराना बयान दिया। इससे स्पष्ट होता है कि युवा पीढ़ी का भविष्य बर्बाद करने वाले इस ज़हर के व्यापार को रोकने को लेकर वे गंभीर नहीं हैं। एक ओर बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ भाषण देने वाले सत्ताधारी नेता दूसरी ओर बांग्लादेशियों को लाकर ड्रग्स फैक्ट्रियां चला रहे हैं।उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को ‘जेब में रखने’ का बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। क्या शाह के दबाव के कारण इस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो रही? इसका भी सरकार को स्पष्टीकरण देना चाहिए, ऐसा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा।

चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली भी पारदर्शी और निष्पक्ष नहीं है।चुनाव आयोग ने आज भले ही चुनावों की तारीखों की घोषणा की हो, लेकिन मतदाता सूचियों, डुप्लीकेट मतदाताओं और वार्ड रचना को लेकर हमने ठोस सबूतों के साथ आपत्तियां और हरकतें दर्ज कराई थीं। बावजूद इसके आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं की। पुणे में सत्ताधारी दल का एक कार्यकर्ता खुलेआम वार्ड रचना करता दिख रहा है, फिर भी आयोग चुप क्यों है, यह समझ से परे है।राज्य में महानगरपालिकाओं के चुनाव हो रहे हैं, लेकिन ये चुनाव पारदर्शी और निष्पक्ष नहीं होंगे, यह अब स्पष्ट दिखाई दे रहा है, ऐसा हर्षवर्धन सपकाल ने कहा।

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