मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र सरकार के एक नए सरकारी प्रस्ताव (GR) के बाद होम्योपैथी डॉक्टरों के लिए आधुनिक (एलोपैथिक) दवाएं लिखने का रास्ता खुल गया है। सरकार ने महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) को निर्देश दिया है कि एक वर्षीय सर्टिफिकेट कोर्स पूरा कर चुके होम्योपैथ डॉक्टरों का पंजीकरण शुरू किया जाए, जिससे वे आधुनिक चिकित्सा पद्धति के तहत दवाएं लिख सकें।
हालांकि, सरकारी आदेश जारी होने के पूरे दिन एक भी पंजीकरण मंजूर नहीं हुआ। पहला पंजीकरण सोमवार रात करीब 8:30 बजे किया गया।


इस फैसले के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने मंगलवार को हड़ताल का आह्वान किया था, लेकिन मुंबई में इसका असर सीमित रहा। अधिकांश निजी क्लीनिक और ओपीडी सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होती रहीं।
सरकार ने होम्योपैथ डॉक्टरों की कथित लापरवाही से जुड़े मामलों की शिकायतों के निपटारे के लिए एक समिति गठित करने का फैसला किया है। हालांकि, जब तक यह व्यवस्था पूरी तरह लागू नहीं होती, तब तक ऐसे मामलों से निपटने के लिए कोई स्पष्ट कानूनी ढांचा मौजूद नहीं है।
मंगलवार दोपहर चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव धीरज कुमार ने IMA प्रतिनिधियों को चर्चा के लिए आमंत्रित किया।
IMA के प्रतिनिधि डॉ. उत्तुरे ने कहा कि संगठन ने अस्पतालों में आपातकालीन सेवाएं जारी रखने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि यदि MMC बड़े पैमाने पर पंजीकरण शुरू करता है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस विरोध में एसोसिएशन ऑफ मेडिकल कंसल्टेंट्स (AMC) के विशेषज्ञ डॉक्टर भी शामिल हो सकते हैं।
वहीं, महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) ने भी आंदोलन की घोषणा की है। संगठन के अनुसार, राज्यभर के करीब 12,000 रेजिडेंट डॉक्टर बुधवार से ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार करेंगे, जबकि गुरुवार से आपातकालीन सेवाओं का भी बहिष्कार शुरू किया जाएगा। इससे सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है।
इसके अलावा, बीएमसी के चार मेडिकल कॉलेजों के लगभग 2,000 रेजिडेंट डॉक्टरों ने भी बुधवार से ओपीडी सेवाओं के बहिष्कार का ऐलान किया है। आगे की रणनीति दिनभर की परिस्थितियों के आधार पर तय की जाएगी।
फिलहाल, पिछले वर्ष से करीब 2,500 होम्योपैथ डॉक्टरों के पंजीकरण आवेदन लंबित हैं। वहीं, लगभग 10,000 अन्य डॉक्टर एक वर्षीय फार्माकोलॉजी प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम पूरा कर चुके हैं और पंजीकरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
इस मुद्दे पर मुंबई प्रेस क्लब में आयोजित एक चर्चा के दौरान होम्योपैथिक परिषद के प्रशासक बहुबली शाह ने कहा कि यह मामला पिछले 12 वर्षों से न्यायिक प्रक्रिया में है और अंतिम आदेश कब आएगा, इस पर कुछ भी कहना मुश्किल है।
दूसरी ओर, IMA का पक्ष रखते हुए डॉ. जयेश लेले ने आरोप लगाया कि अंतिम न्यायिक आदेश से पहले जल्दबाजी में पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू करने का उद्देश्य निजी होम्योपैथी कॉलेजों में दाखिले बढ़ाना है। उनका दावा है कि ऐसे कई कॉलेज राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों से जुड़े हुए हैं।


