भिवंडी के नालापार क्षेत्र में ज़हरीले धुएँ का कहर: नागरिकों का जीना हुआ दुश्वार।

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मुंबई वार्ता संवाददाता।भिवंडी

भिवंडी का नालापार क्षेत्र इन दिनों गंभीर प्रदूषण की समस्या से जूझ रहा हैं।क्षेत्र में स्थित तीन साइजिंग कंपनियां में लगे चिमनियों से लगातार निकलता काला जहरीला धुआं लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहा है।जिसके कारण स्थानीय निवासी आंखों,सांस व एलर्जी जैसी बीमारियों की चपेट में तेजी से फंस रहे है। इसके बावजूद महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व मनपा का पर्यावरण विभाग इस गंभीर मुद्दे पर पूरी तरह उदासीन बना हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पर्यावरण विभाग ने रिश्वतखोरी के कारण इन कंपनियों को मनमानी करने की खुली छूट दे रखा है।जो लोगो में आक्रोश का कारण बन हुआ है।

भिवंडी शहर के नालापार, आज़मी नगर, देव नगर जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्र है।जहां पर रहने वाले नागरिक इन दिनों गंभीर प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं।क्षेत्र में स्थित तीन साइजिंग कंपनियां सना साईजिग, मोनू लाल मोहम्मद की साईजिंग,अलंकार साइजिग , युनिटी साईजिंग की चिमनियों से लगातार उठता काला जहरीला धुआं लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहा है।

स्थानीय निवासियों जावेद खान के अनुसार इन कंपनियों से निकलने वाले जहरीले धुएं के कारण लोगों के आंखों में जलन, सांस की दिक्कत और बच्चों में एलर्जी जैसी बीमारियों में तेजी से वृद्धि हो रही है। इस गंभीर मुद्दे पर मनपा का पर्यावरण विभाग पूरी तरह से मौन है।स्थानीय लोगों ने आरोप लगाते हुए बताया कि कल्याण प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने इन कंपनियों में हफ्ता बांध रखा है।जिसके कारण इन के मनमाने कार्यभार पर अंकुश नहीं लगाया जा रहा है।

लोगो ने आरोप लगाते हुए बताया है कि इस विभाग का एक निजी कर्मचारी संजय केणे का पर्यावरण विभाग से कोई संबंध नहीं है, फिर भी वह विभागीय कार्यों में हस्तक्षेप करता है।सूत्र बताते है कि केणे की नियुक्ति केवल प्रदूषण मापन हेतु लगाई गई मशीनों पर लैब कार्य के लिए हुई थी, किंतु अब वह पालिका के पर्यावरण विभाग में वसूली एजेंट की भूमिका में कार्यरत है।विभाग प्रमुख कोई भी हो, साइजिंग और डाइंग कंपनियों से संबंधित निर्णयों में अंतिम प्रभाव संजय केणे का ही देखा जाता है।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा कई बार मनपा और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (कल्याण विभाग) को शिकायतें दर्ज कराई गई हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। जबकि कंपनियों से अवैध वसूली का खेल चलता रहता है।इतना ही नहीं शहर में इन दिनों कचरा बिक्री माफिया उदय द्वारा लकड़ी, रबर, प्लास्टिक, पुराने जूते-चप्पल जैसे कचरे को कम कीमतों पर साइजिंग कंपनियों को बेचा जा रहा है।जिसकी मदद से कंपनियाँ इस कचरे को जलाकर भाप (स्टीम) तैयार करती हैं, जिससे जहरीला धुआं निकलता है। परिणामस्वरूप, इन चिमनियों से लगातार प्रदूषण फैलता है और नागरिकों का स्वास्थ्य दांव पर लग जाता है।

शहर के पर्यावरणविदों और नागरिक समूहों ने प्रशासन से मांग की है कि इन कंपनियों की गतिविधियों की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की जाए। निजी व्यक्ति संजय केणे की भूमिका की जांच हो और उचित कार्रवाई की जाए। प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों का लाइसेंस नवीनीकरण रोका जाए जब तक वे पर्यावरण मानकों का पालन न करें।

प्रदूषण स्तर मापने वाली मशीनों की निगरानी किसी स्वतंत्र एजेंसी से करवाई जाए और पुराने नियुक्त कर्मचारियों का हस्तांतरण कर नये कर्मचारियों की नियुक्ति की जाये और उनका मनपा के पर्यावरण विभाग से कोई संबंध ना हो।हालांकि इस संबंध में जानकारी के लिए कई बार कल्याण पर्यावरण विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी पाटिल मैडम से संपर्क करने की कोशिश की गई,लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

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