श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

मुंबई उपनगर के पालकमंत्री एडवोकेट आशीष शेलार ने कहा है कि मुंबईकरों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) को स्वास्थ्य व्यवस्था से संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाओं की समीक्षा कर आवश्यक सुधारों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी चाहिए तथा आधुनिक स्वास्थ्य तकनीकों को अपनाकर व्यवस्था को अधिक सक्षम और समकालीन बनाया जाना चाहिए। उन्होंने महानगरपालिका अस्पतालों के ओपीडी और शौचालयों की मौजूदा स्थिति में प्राथमिकता के आधार पर सुधार करने के निर्देश भी दिए।


बीएमसी के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग की स्थिति और आधुनिकीकरण को लेकर सोमवार को सह्याद्री अतिथिगृह में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुंबई उपनगर के पालकमंत्री आशीष शेलार, सह-पालकमंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा तथा मुंबई की महापौर रितू तावडे उपस्थित थीं।
इस दौरान विधायक अमित साटम, विद्या ठाकुर, योगेश सागर, मनीषा चौधरी, संजय उपाध्याय, कैप्टन तमिल सेलवन, बीएमसी में सत्तारूढ़ दल के नेता गणेश खनकर, स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे, सार्वजनिक स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष हरीश भांडिर्गे, मनपा आयुक्त अश्विनी भिडे, अतिरिक्त आयुक्त (पश्चिम उपनगर) डॉ. विपिन शर्मा, संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) डॉ. मनोज कुमार शर्मा, उप आयुक्त (सार्वजनिक स्वास्थ्य) शरद उघाडे, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रमुख अस्पतालों के निदेशक डॉ. शैलेश मोहिते, कार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दक्ष शाह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. चंद्रकांत पवार सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।


बैठक की शुरुआत में बीएमसी द्वारा उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सेवाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। इसके बाद उपस्थित विधायकों ने मरीजों को आने वाली परेशानियों, स्वास्थ्य सेवाओं में कमियों, अस्पताल पुनर्विकास परियोजनाओं में देरी और अन्य प्रशासनिक बाधाओं से जुड़े मुद्दे उठाए तथा कई सुझाव और शिकायतें प्रशासन के समक्ष रखीं।
पालकमंत्री आशीष शेलार ने कहा कि राज्य स्वास्थ्य विभाग, शहरी विकास विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों से जुड़े प्रशासनिक मुद्दों के समाधान के लिए मुख्यमंत्री की उपस्थिति में विशेष बैठक आयोजित की जानी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि मरीजों की देखभाल को प्रभावित करने वाले सभी पहलुओं का व्यापक अध्ययन कर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए आवश्यक सुधारों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए।
उन्होंने कहा कि केवल बजट बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि आधुनिक चिकित्सा तकनीकों (मेडटेक) को अपनाने के प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि मुंबई की स्वास्थ्य सेवाएं राष्ट्रीय और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाई जा सकें। साथ ही, बीएमसी की स्वास्थ्य सुविधाओं और योजनाओं की नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित करने की भी घोषणा की।
महापौर रितू तावडे ने स्वास्थ्य विभाग में रिक्त पदों को जल्द भरने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि कोविड-19 महामारी के दौरान संविदा के आधार पर सेवाएं देने वाले कर्मचारियों को भर्ती प्रक्रिया में एकमुश्त विशेष नीति के तहत प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने सिद्धार्थ अस्पताल और राजावाड़ी अस्पताल सहित लंबित पुनर्विकास परियोजनाओं को युद्धस्तर पर पूरा करने के निर्देश दिए।
महापौर ने प्रमुख अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग कॉटेज सुविधा उपलब्ध कराने, ‘जीरो प्रिस्क्रिप्शन’ सेवा शीघ्र शुरू करने, टाटा मेमोरियल अस्पताल के पास कैंसर मरीजों के परिजनों के लिए विशेष कॉरिडोर बनाने, केईएम अस्पताल में एआरटी विभाग शुरू करने और उसके संग्रहालय के नवीनीकरण, कूपर अस्पताल में ईएमएस वार्ड तथा बीएमसी के पोस्टमार्टम केंद्र की स्थापना और सायन स्थित लोकमान्य तिलक महानगरपालिका अस्पताल में मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर विकसित करने के निर्देश भी दिए।
इसके अलावा, महापौर रितू तावडे ने मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कक्ष की तर्ज पर ‘मेयर मेडिकल असिस्टेंस सेल’ स्थापित करने का प्रस्ताव रखा और मरीजों को पारदर्शी एवं सुलभ सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए।
विधायक अमित साटम ने मुंबई में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर देते हुए डायलिसिस सुविधाओं के विस्तार, ‘डायबिटीज फ्री मुंबई’ अभियान शुरू करने, प्रस्तावित कैंसर उपचार बिस्तरों को समय पर शुरू करने, मानसिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने और अस्पतालों की बिस्तर क्षमता के अनुसार बजट आवंटन बढ़ाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में बीएमसी के स्वास्थ्य तंत्र में लगभग पांच हजार नए अस्पताल बिस्तर जुड़ने वाले हैं। ऐसे में डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ और सहायक कर्मचारियों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए अभी से व्यापक मानव संसाधन योजना तैयार की जानी चाहिए।
उन्होंने नर्सों, ओपीडी डॉक्टरों, सुरक्षा कर्मियों और मरीजों से सीधे संपर्क में रहने वाले कर्मचारियों के लिए संवेदनशीलता प्रशिक्षण पर भी जोर दिया, ताकि महानगरपालिका अस्पतालों में मरीजों को अधिक सम्मानजनक, संवेदनशील और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।


